एनसीएल की कोयला खदानों में ओवर बर्डेन निस्तारण का काम करने वाली आउटसोर्सिंग कंपनियों की ओर से ओवरलोड एवं तेज गति से वाहनों के संचालन की शिकायत पर शुक्रवार को प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग ने साझा कार्रवाई की। इससे कंपनियों में हड़कंप की स्थिति बनी रही। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 25 से अधिक डंपर, बसें और जेसीबी मशीन को सीज कर दिया गया।
शुक्रवारकी सुबह दस बजे शुरू हुआ अभियान शाम पांच बजे तक तक चला। एसडीएम (आईएएस) स्वरोचिश सोमवंशी, आरटीओ एसपी द्विवेदी की अगुवाई में सबसे पहले निगाही परियोजना से चेकिंग अभियान शुरू हुआ। यहां काम कर रही बीजीआर कंपनी के डंपरों की जांच के दौरान कई जरूरी कागजात नहीं मिले। इसको नियम के खिलाफ बताते हुए अधिकारियो ने आठ डंपरों को कब्जे में ले लिया। नियमों के उल्लंघन के आरोप में एक जेसीबी मशीन, तीन पानी के टैंकर और एक बस को भी सीज किया गया।
इसके बाद टीम जयंत परियोजना के खदान क्षेत्र में पहुंची। यहां बीपीआर कंपनी के वाहनों की जांच की गई। जांच के दौरान नियम का पालन न पाए जने पर 15 से अधिक डंपरों-कई छोटे बड़े वाहन सीज कर दिए गए। सभी वाहनों को कब्जे में लेने के बाद पुलिस ने मोरवा थाने में खड़ा में करा दिया। मुड़वानी डैम, शुक्ला मोड़ सहित अन्य स्थानों पर भी चेकिंग कर कई वाहनों को सीज किया। पूरे दिन चली कार्रवाई से आउटसोर्सिंग कंपनियों कंपनियों के अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति बनी रही। अधिकारियों का कहना था कि बिना परमिट और टैक्स के वाहनों के संचालन से मप्र सरकार को अब तक करोड़ों का चूना लग चूका है। विधिवत जांच के बाद संबंधितों से ठेका अवधि के हिसाब से अब तक टैक्स की वसूली की जाएगी। ओवरलोड, गति को लेकर भी कड़े उठाए जाएंगे।