घोरावल इलाके के गांवों में नलकूप से सिंचाई का मामला खटाई में पड़ गया है। इन गांवों में भूजल का स्तर इतना कम है कि वहां नलकूप सफल ही नहीं होंगे। यह खुलासा लखनऊ के भूभर्ग शास्त्री नरेश अवस्थी की टीम की जांच में हुआ है। दरअसल इन गांवों में भूजल का स्तर एक इंच से ज्यादा नहीं जबकि नलकूप से एक क्यूसेक पानी निकालने के लिए आठ इंच मोटा पानी स्ट्रेटा जरूरी होता है।
घोरावल इलाका सूखे की मार से बदहाल है। कई वर्षों से इस इलाके में कम बारिश के चलते खेती प्रभावित है। क्षेत्र के सर्वाधिक प्रभावित 15 गांवों में नलकूप लगाने का प्रस्ताव विधायक रमेशचंद्र दूबे ने शासन को भेजा था, जिसे मंजूरी भी मिल गई। भूभर्ग वैज्ञानिकों की टीम को नलकूप लगाने के लिए सर्वे करने को भेजा गया था। टीम ने पांच गांवों का निरीक्षण किया और भूगर्भ जल की स्थिति की पड़ताल की।
भूभर्ग वैज्ञानिक नरेश अवस्थी की टीम के साथ भड़ना, अमौली, कोहरथा, शिवद्वार और सोतिल गांव में जाकर जांच की। जलस्तर की जांच में किसी गांव में एक इंच का भूजल स्तर मिला तो कहीं पौने इंच। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक क्यूसेक पानी निकालने के लिए जलस्तर एक इंच मोटा होना चाहिए, अन्यथा नलकूप फेल हो जाएगा। इससे कम पानी होने पर खेतों की सिंचाई संभव नहीं हो पाएगी।
मिर्जापुर नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता भूपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ऐसे में एक भी नलकूप नहीं लग पाएंगे क्योंकि जरूरत के मुताबिक पानी ही नहीं मिल पाएगा और सभी नलकूप फेल हो जाएंगे।