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Sonebhadra News: 24 घंटे में आठ बार ट्रिपिंग, हर बार 20 मिनट गुल रहती है बिजली

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सोनभद्र। जिस जिले में बिजली बनती है, वहां ही आपूर्ति का हाल ठीक नहीं है। कागजों में तो 18 से 24 घंटे तक बिजली दी जा रही है, लेकिन इसमें ट्रिपिंग का कोई जिक्र नहीं है। हाल यह है कि दिन में हर 30 से 45 मिनट पर बिजली ट्रिप कर जा रही है। फिर 15 मिनट से लेकर आधे घंटे तक बिजली का इंतजार करना पड़ता है। इस तरह से रोजाना सात से आठ बार कटाैती हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और बदतर है।
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शासन ने जिला मुख्यालय पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 22 तो ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने का निर्देश दिया है। इससे इतर जिले में निगम तय शेड्यूल का पालन नहीं करा पा रहा है। रॉबर्ट्सगंज में आपूर्ति देने वाले हाइडिल और छपका विद्युत उपकेंद्र से रोजाना ट्रिपिंग के नाम पर बिजली गुल हो रही है। बुधवार की रात बढ़ौली फीडर से 11.20 से 11.45 तक बिजली गुल रही। इसके बाद रात में भी कई बार आवाजाही बनी रही। सुबह 11 बजे, दो बजे और फिर शाम को साढ़े पांच बजे के आसपास बिजली गुल रही। विभागीय कर्मी इसके लिए ट्रिपिंग को कारण बताते रहे। उपभोक्ता राहुल, अजीत आदि का कहना है कि हर रोज ट्रिपिंग के कारण दिन में सात-आठ बार बिजली गुल होती है। हर बार 15-20 मिनट बाद ही आती है। बावजूद बिजली निगम 24 घंटे की आपूर्ति का दावा किस आधार पर करता है। दुद्धी: तहसील मुख्यालय पर 22 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है, लेकिन शेड्यूल से कम बिजली मिल रही है। बुधवार की रात 11.26 से रात 12 बजे तक रोस्टिंग के तहत 33 केवी से आपूर्ति बंद रही। वहीं बृहस्पतिवार की सुबह 7.40 से 8.40 तक रोस्टिंग से बिजली आपूर्ति बंद रही। दोपहर में फिर 03.03 बजे से 4.33 बजे तक रोस्टिंग के नाम पर 33 हजार की लाइन बंद रखी गई। इसके अलावा भी लोकल फाॅल्ट के नाम पर घंटों बिजली गुल रही है। निगम के अफसर इसे ओवरलोड का कारण बताते हैं।
शेड्यूल के अनुसार उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति दी जा रही है। बीच में कोई फाॅल्ट आने पर मरम्मत के लिए कुछ देर के लिए बिजली बंद करनी पड़ती है। गर्मी के कारण ओवरलोड से ट्रिपिंग की समस्या आती है, जिसका तुरंत समाधान कराया जाता है। -इं. एके सिंह, एक्सईएन।
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बिजली की मांग ने तोड़ा रिकॉर्ड, 31 हजार का आंकड़ा पार
सोनभद्र। भीषण गर्मी और उमस के बीच सूबे में बिजली की मांग ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पीक ऑवर में बिजली की मांग ने 31 हजार मेगावाट का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले पांच दिनों में दो हजार मेगावाट की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य उत्पादन निगम की इकाइयां इस बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए क्षमता से अधिक उत्पादन कर रही है। लोड डिस्पैच सेंटर के आंकड़ों पर गौर करें तो बृहस्पतिवार को बिजली की अधिकतम मांग 31457 मेगावाट रही। यह मांग रात 12.45 बजे दर्ज की गई। जबकि न्यूनतम मांग 21404 मेगावाट दर्ज की गई। पांच दिन पहले सात जून को बिजली की मांग 29502 मेगावाट थी। महज पांच दिनों में बिजली की मांग दो हजार मेगावाट बढ़ने के पीछे भीषण गर्मी और उमस को कारण बताया जा रहा है। रिहंद और ओबरा की जल विद्युत इकाइयों से भी उत्पादन कराया जा रहा है।
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