गुरुवार को ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र के रास पहाड़ी पर हुई विस्फोट की घटना और उसमें सात श्रमिकों की हुई मौत से एकबारगी क्षेत्रवासी, कारोबारी के साथ जिला प्रशासन हिल गया। साथ ही इस घटना से वर्ष 2012 में 27 फरवरी को बिल्ली-मारकुंडी के खनन क्षेत्र में हुए हादसे की याद ताजा हो गई।
27 फरवरी 2012 को खदान धंसने से 12 लोंगों की मौत हुई थी। इस दौरान क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। इस हादसे के बाद लंबे समय तक खनन का कार्य बंद हो गया था। साथ ही मामले की मजिस्ट्रीयल जांच बैठा दी गई थी।
सीडीओ ने मामले की जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप भी दी लेकिन उसमें आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई, परिणामस्वरुप पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
बताते चले ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में खनन का कारोबार होता है। वर्ष 2012 में हुई घटना के दौरान मलबे में दबे मजदूरों को निकालने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन को घंटों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी।
हादसे के बाद उस समय जिले में तैनात जिलाधिकारी वीवी पंत ने जिले में बालू और पत्थर का खनन कार्य को पूरी तरह बंद करवा दिया था। वर्ष 2015 में तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर सीडीओ ने खनन हादसे की जांच में तेजी लाई।
सूत्रों की मानें तो कुछ माह पूर्व सीडीओ ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है, लेकिन अभी तक खनन हादसे के दोषी अधिकारियों और अवैध खननकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई।
इतने बड़े मामले में किसी के विरुद्ध ठोस कार्रवाई न होने से अवैध खननकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। लोगों की मानें तो वर्ष 2012 मेें खनन हादसे के जिम्मेदरानों के खिलाफ कार्रवाई की गई होती तो शायद गुरुवार को रासपहरी खनन क्षेत्र में विस्फोट की घटना नहीं हुई होती।