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बंद अनपरा तापीय परियोजना की तीनो इकाईयां उत्पादनरत

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अनपरा। उत्पादन निगम की 2630 मेगावाट की अनपरा अ तापीय परियोजना की तकनीकी कारणो से बंद 210 मेगावाट की सभी इकाइयाें को शनिवार की प्रात: उत्पादनरत कर लिया गया। इस दौरान बंद इकाइयाें को चालू करने में लाखों रुपये का उत्पादन निगम को नुकसान उठाना पड़ा।
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अनपरा अ तापीय परियोजना की 210 मेगावाट की पहली,दूसरी व तीसरी इकाई सीडब्लूएस के ट्रांसफार्मर में आए जर्क के कारण शुक्रवार की अपराह्न दो बजे बंद हो गयी थी जिसे शुक्रवार की प्रात: उत्पादनरत कर लिया गया। पहली इकाई सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर , दूसरी इकाई 5 बजकर 30 मिनट पर और तीसरी इकाई सात बजे उत्पादनरत कर ली गयी तब जाकर प्रबंधन ने राहत की सांस ली।
विशेषज्ञों के अनुसार 210 मेगावाट की एक यूनिट को चालू करने में 15 से 18 किलोलीटर तेल को जलाया जाता है ऐसे में 5 अक्टूबर को पंाच इकाइयाें व 9 अक्टूबर को तीन इकाइयाें के एक साथ ट्रिप कर जाने से अब तक उत्पादन निगम को इन इकाइयाें को उत्पादनरत करने में करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ चुका है। 500 मेगावाट की एक इकाई को उत्पादनरत करने में 30 से 35 किलोलीटर तेल का उपयोग किया जाता है। ऐसे में तेल के साथ-साथ अन्य और भी सूक्ष्म उपकरण जो ब्वायलर को चालू करने में अपना योगदान देते है उनकी सुरक्षा भी परियोजना प्रबंधन के लिए एक चुनौती होती है। किसी भी उपकरण मे खराबी आने के बाद इकाई को उत्पादनरत करना आसान नही होता है।
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फायर गन की भूमिका अहम होती है। अनपरा परियोजना की सबसे सस्ती बिजली होने के कारण जब किसी भी इकाई से उत्पादन ठप होता है तो लोड डिस्पैच सेंटर पर दबाव बढ़ जाता है। प्रदेश में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए फिर महंगी बिजली खरीदना ही एक मात्र विकल्प रह जाता है। जिससे किसी भी इकाई के बंद होने से दोहरा मार प्रबंधन को झेलना पड़ता है। जो इकाई जितना अधिक समय से बंद रहेगी उसे चालू करने मे उतना ही समस्या आती है। इस दौरान ट्रिप की गयी सभी तीनों इकाईयों से क्रमश: 131,169 व 165 मेगावाट का उत्पादन किया जा रहा था। 500 मेगावाट की अनपरा परियोजना की चौथी व पांचवीं इकाई से क्रमश: 427 व 485 मेगावाट तथा अनपरा डी की छठवी इकाई से 440 मेगावाट का विद्युत उत्पादन किया जा रहा था। इस दौरान प्रदेश मे बिजली की डिमांड 16538 मेगावाट बनी रही।
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