ऊर्जांचल सहित पूरे सोनभद्र के लिए अभिशाप बन चुकी एनीमिया के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य, बाल विकास एवं पुष्टाहार और शिक्षा विभाग तीनों मिलकर काम करेंगे। सूबे के मुख्य सचिव आलोक सचिव ने सप्ताह पूर्व ही जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे जुड़ी नीपी और वीफ्स योजना का सही संचालन हो, इसके लिए डीएम और सीडीओ को जिम्मेदारी दी गई है। 10 अगस्त से पूर्व इसके लिए जिले से लेकर ब्लाक स्तर तक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी, शिक्षकों की कार्यशाला के साथ ही शिक्षकों की कार्यशाला पूरी करने के साथ ही जरूरी तैयारियां पूर्ण कर लेने के निर्देश दिए गए हैं।
फरमान में कहा है कि वर्ष 2005-06 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वे में ही यह बात स्पष्ट हो गई थी कि सोनभद्र सहित पूरे सूबे में बड़े पैमाने पर बच्चे, किशोर, महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। इसको देखते हुए समय-समय पर कई कार्यक्रम चलाए गए लेकिन विभागों में समन्वय के अभाव के कारण पहल कामयाब नहीं हो पाई। इसको देखते हुए इस बार स्वास्थ्य, बाल विकास के साथ शिक्षा विभाग को बराबर का जिम्मदार बनाने का निर्णय लिया गया है।
इस बारे में सीडीओ महेंद््र सिंह का कहना है कि दिशा-निर्देश का अध्ययन किया जा रहा है। समय रहते इसको लेकर जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। पूरी कोशिश होगी कि जल्द एनीमिया की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित हो जाए।