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Sonebhadra News: 92 किमी में बनेंगे तीन बाईपास

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दुद्धी। रीवा-रांची मार्ग के अंतर्गत जिले की सीमा में आने वाली करीब 92 किमी लंबी सड़क के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। शासन के निर्देश पर दिल्ली की कंपनी ने प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है। इसे अनुमोदन के लिए भेजा गया है। अब जल्द ही इसकी डीपीआर तैयार की जाएगी। सर्वे के मुताबिक मार्ग पर पड़ने वाले चार निकायों की घनी आबादी को विस्थापन से बचाने के लिए तीन बाईपास का प्रस्ताव रखा गया है। दुद्धी और अनपरा में बाईपास का रूट तय है। रेणुकूट-पिपरी के पास बाईपास के लिए तीन विकल्प रखे गए हैं। डीपीआर में तय होगा कि इनमें से किसी रूट से बाईपास गुजरेगा।
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मप्र और यूपी को झारखंड को जोड़ने वाले रीवा-रांची मार्ग की कुल 91.47 किमी की दूरी जिले की सीमा में है। इस सड़क पर वाहनों का दबाव काफी ज्यादा है। मप्र और झारखंड के हिस्से में सड़क के चौड़ीकरण का काम पूरा हो चुका है, लेकिन यूपी के हिस्से में शुरुआत भी नहीं हो पाई। टू लेन की सड़क होने के कारण इस पर आए दिन हादसे होते हैं। अनपरा से रेणुकूट और हाथीनाला तक का क्षेत्र सबसे खतरनाक इलाकों में है। जंगल के बीच से गुजरी सड़क काफी घुमावदार होने के कारण अक्सर वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। बीच सड़क पर वाहनों के खराब होने पर लंबा जाम भी लगता है। हादसों को रोकने के लिए लंबे समय से सड़क के चौड़ीकरण की मांग उठती रही है। अब इसकी कवायद तेज हुई है। थीम इंजीनियरिंग कंपनी को इसका जिम्मा सौंपा गया है। फिलहाल कंपनी ने प्रारंभिक सर्वे का काम पूरा कर लिया है। इस मार्ग पर दुद्धी, रेणुकूट, पिपरी और अनपरा चार प्रमुख निकाय हैं। इनकी बड़ी आबादी हाईवे के किनारे बसी है। चौड़ीकरण में इनका विस्थापन होना है। सर्वे रिपोर्ट में इसका पूरा ध्यान रखते हुए तीन बाईपास बनाने का सुझाव दिया गया है। एक बाईपास दुद्धी और दूसरा अनपरा में बनेगा। तीसरा बाईपास रेणुकूट-पिपरी नगर के लिए बनाया जाना है। रेणुकूट-पिपरी बाईपास के लिए सर्वे में तीन रूट प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें से सबसे सुगम और सहूलियत भरे रूट का चयन कर सर्वे रिपोर्ट को अनुमोदन दिया जाना है। इसके बाद डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

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वर्जन...

फोरलेन सड़क के लिए मंत्रालय ने कार्यदायी संस्था को नामित कर दिया है। उसकी ओर से प्रारंभिक सर्वे का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। इसके अनुमोदन के बाद डीपीआर तैयार कराई जाएगी। फिर टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण कार्य होगा। इसमें करीब एक वर्ष का समय लगने की उम्मीद है।
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- शैलेश यादव, अवर अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग 39
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