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डेढ़ लाख लोगों की बुझेगी प्यास : धंधरौल बांध पर तैरते इंटेकवेल से होगा फायदा, 205 गांव लाभांवित; ऐसे होगा काम

Sun, 13 Oct 2024 06:12 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

Sonbhadra News: इस इंटेक से 205 गांवों के 23,779 ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ पेयजल की सप्लाई किया जाएगा। इंटेक से लिया जाने वाला रॉ-वाटर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचेगा और यहां से सात पानी टंकियों के माध्यम से पेयजल सप्लाई की जाएगी।
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सोनभद्र के धधरौल बांध में लगा इंटेक वेल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोनभद्र के धंधरौल बांध पर बने तैरते इंटेकवेल से क्षेत्र के 1.43 लाख ग्रामीणों की प्यास बुझेगी। जल जीवन मिशन की सबसे अनोखी योजना बेलाही ग्राम समूह पाइप पेयजल योजना बनकर तैयार है। 

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जल जीवन मिशन (हर घर जल) कार्यक्रम के तहत जनपद सोनभद्र में 12 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं का निर्माण विभिन्न फर्मों से कराया जा रहा है। योजनाओं में जल आहरण के लिए सोन नदी, रेणु नदी, धंधरौल बांध, नगवां बांध एवं रिहन्द बांध के किनारे पारंपरिक इंटेकवेल का निर्माण किया जाना है। रिहंद, धंघरौल और नगवां बांध का धरातल पथरीला होने के कारण पारंपरिक इंटेकवेल के निर्माण में अत्यधिक समय एवं खर्च लगना था। 

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फ्लोटिंग इंटेक सिस्टम की खूबियां
साथ ही अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने में भी काफी कठिनाई आ रही थी। इसके समाधान के लिए वारी पोन्टून पुणे से फ्लोटिंग इंटेकवेल के लिए प्रस्तुतीकरण लिया गया और इसके लाभ को देखते हुए नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव को जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने इन नई विधि से सोनभद्र में पेयजल की चुनौतियों से निपटने का निर्णय लिया और फ्लोटिंग इंटेक सिस्टम का कार्य प्रारंभ किया गया। 

बता दें कि सोनभद्र क्षेत्रफल की दृष्टि से यूपी का दूसरा सबसे बड़ा जिला है। जो चार राज्य मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ एवं बिहार से घिरा हुआ है। सोनभद्र का 50 प्रतिशत भाग पहाड़ी एवं पथरीला होने के कारण भूमिगत जल में अशुद्धियां एवं जलस्तर कम है।

यह संरचना जल कि सतह पर तैरती रहती है, जिस कारण इसे आसानी से अत्यधिक जल की उपलब्धता वाले स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। जिन स्थानों पर वॉटर बेसिन के अंदर पत्थर या चट्टानें पाई जाती हैं। वहां पारंपरिक इंटेकवेल का निर्माण किया जाना अत्यधिक कठिन होता है। ऐसे स्थानों के लिए फ्लोटिंग इंटक सिस्टम एक आसान विकल्प है। इस संरचना के निर्माण एवं रख रखाव की लागत पारंपरिक इंंटकवेल से कम है।
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