फ्लोटिंग इंटेक सिस्टम की खूबियां
साथ ही अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने में भी काफी कठिनाई आ रही थी। इसके समाधान के लिए वारी पोन्टून पुणे से फ्लोटिंग इंटेकवेल के लिए प्रस्तुतीकरण लिया गया और इसके लाभ को देखते हुए नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव को जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने इन नई विधि से सोनभद्र में पेयजल की चुनौतियों से निपटने का निर्णय लिया और फ्लोटिंग इंटेक सिस्टम का कार्य प्रारंभ किया गया।
बता दें कि सोनभद्र क्षेत्रफल की दृष्टि से यूपी का दूसरा सबसे बड़ा जिला है। जो चार राज्य मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ एवं बिहार से घिरा हुआ है। सोनभद्र का 50 प्रतिशत भाग पहाड़ी एवं पथरीला होने के कारण भूमिगत जल में अशुद्धियां एवं जलस्तर कम है।
यह संरचना जल कि सतह पर तैरती रहती है, जिस कारण इसे आसानी से अत्यधिक जल की उपलब्धता वाले स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। जिन स्थानों पर वॉटर बेसिन के अंदर पत्थर या चट्टानें पाई जाती हैं। वहां पारंपरिक इंटेकवेल का निर्माण किया जाना अत्यधिक कठिन होता है। ऐसे स्थानों के लिए फ्लोटिंग इंटक सिस्टम एक आसान विकल्प है। इस संरचना के निर्माण एवं रख रखाव की लागत पारंपरिक इंंटकवेल से कम है।