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उभ्भा में बाहरी लोगों के जाने पर रहेगा प्रतिबंध

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घोरावल। उभ्भा कांड के दो साल पूरे होने पर आदिवासियों की ओर से संभावित कार्यक्रमों के मद्देनजर शुक्रवार व शनिवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी। उभ्भा गांव को पूरी तरह सील किया जाएगा, ताकि राजनीतिक दलों के नेता गांव में प्रवेश न कर सकें। घोरावल से लेकर उभ्भा तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स व पीएसी की तैनाती रहेगी। आदिवासी बहुल उभ्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को जमीन विवाद में हुए खूनी संघर्ष में जमकर असलहे, लाठी डंडे चले थे। इसमें गोंड़ समुदाय की तीन महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 लोग घायल हुए थे। शनिवार को उभ्भा कांड को दो वर्ष पूरा होने जा रहा है। उभ्भा कांड के पीड़ितों एवं आदिवासी समुदाय में बरसी पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम मनाने की तैयारी चल रही है। आदिवासी समाज के लोग घटनास्थल पर उभ्भा कांड के 11 मृतकों की तस्वीरों को रखकर बरसी के लिए तैयारियों में जुटे हैं। खुफिया एजेंसियों व पुलिस प्रशासन को इसकी भनक लगते ही पूरा प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। बुधवार को एएसपी विनोद कुमार, एसडीएम जैनेंद्र सिंह, सीओ शंकर प्रसाद ने उभ्भा का दौरा कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। आदिवासी समुदाय घटनास्थल पर बरसी मनाना चाहता है लेकिन प्रशासन ने अभी तक इसकी अनुमति नहीं दी है। उधर, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उभ्भा निवासी रामराज गोंड़ का कहना है कि आदिवासी समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रशासन बरसी की अनुमति दे। वहीं बरसी पर एक बार फिर राजनीतिक दलों के नेताओं के उभ्भा आने की संभावना के मद्देनजर प्रशासन किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतना चाहता। शनिवार को पुलिस फोर्स लगाकर उभ्भा गांव को सील कर दिया जाएगा और उभ्भा जाने वाले तमाम रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी ताकि वहां राजनीतिक दलों के लोग न पहुंच सके। घोरावल सीओ शंकर प्रसाद ने बताया कि शुक्रवार से ही उभ्भा गांव व आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। उभ्भा गांव को सील करते हुए सभी रास्तों पर बैरियर लगाकर नाकेबंदी की जाएगी और बाहरी लोगों को गांव में जाने की अनुमति नहीं होगी।
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