सोनभद्र। अभिलेखीय परीक्षण की आड़ में मिलजुमला (कई सह खातेदार) नंबरों वाली आराजी में धारा चार (वन भूमि) के आंशिक प्रभाव की आड़ लेकर खनन पट्टों के संचालन का खेल खेला जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसका सहारा लेकर कई पट्टों को चालू भी कर लिया गया। मामले ने जब तूल पकड़ा तो कुछ को आनन-फानन में बंदी का आदेश थमा दिया गया। इसी तरह आठ और को चालू करने की अंदरखाने कोशिश जारी है।
प्रशासनिक टीम की तरफ से डीएम को अलग-अलग तिथियों में पेश की गई दो रिपोर्टों पर नजर डालेंगे तो पता चलेगा कि 29 मार्च 2019 को रिपोर्ट में उल्लिखित तीन खनन पट्टों को आठ जुलाई 2019 की रिपोर्ट में धारा चार से आंशिक प्रभावित दर्शाया गया। बताते हैं कि इसके बाद पट्टे की एरिया के एक हिस्से में खनन की अनुमति दे दी गई। जबकि जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश खनिज परिहार नियमावली 1863 के तहत कोई भी पट्टा आंशिक रूप से संचालित नहीं हो सकता। किन्हीं परिस्थितिवश यह आवश्यक होगा तो डीएम से संस्तुति भेजवाकर शासन से अनुमति लेनी पड़ेगी। इसके लिए नए सिरे से माइनिंग प्लान भी बनाना पड़ेगा लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया और बड़ी ही बारीकी से खनन पट्टा एरिया के एक हिस्से को धारा चार से बाहर बताकर कई खनन पट्टों को चालू करा दिया गया। ज्ञात हो कि पहले की रिपोर्ट में नौ खनन पट्टों की कुछ एरिया धारा चार से बाहर दशाई गई थी। तीन माह बाद तैयार की गई रिपोर्ट में तीन और खनन पट्टों को इसमें शामिल कर लिया गया। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ में खनन चालू करा दिया गया है और कुछ में चालू कराने के लिए कागजी कवायद जारी है। इस संबंध में खनन अधिकारी केके राय का कहना है कि बंद खनन पट्टों में से फिलहाल एक ही पट्टा चालू है। अन्य चालू नहीं है। रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नहीं है।