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यहां मिलते हैं दुनिया के सबसे खतरनाक सांप

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राबर्ट्सगंज में नागपंचमी की पूर्व संध्या पर फन फैलाएं नागराज। - फोटो : SONBHADRA
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सोनभद्र। सावन शुक्ल की पंचमी पर मंगलवार को नागपंचमी पर नाग देव की पूजा का विधान है। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए लोग नाम पंचमी पर विशेष अनुष्ठान करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नाग को दूध और लावा चढ़ाने की भी प्रथा है। इस दिन लोग नाग के दर्शन को भी शुभ मानते हैं। वैसे तो हर जगह सांप पाए जाते हैं, लेकिन सोनभद्र में सांपों की तीन ऐसी प्रजातियां पाई जाती हैं, जो खतरनाक हैं। इसमें से एक का जहर तो इतना खतरनाक है कि तत्काल उपचार न मिले तो बचना मुश्किल है।
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दुनिया की दस सबसे जहरीली प्रजातियाें में से तीन सोनभद्र की पहाड़ियों और जंगलों में पाए जाते हैं। इन प्रजातियों में करैत, कोबरा और रसेल वाइपर शामिल हैं। 80 से 100 लोग हर साल इन सांपों के डसने से काल के गाल में जाते हैं। करैत और कोबरा के बारे में तो अक्सर सुनने को मिलता है, लेकिन रसेल वाइपर सिर्फ सोनभद्र में ही मिलता है। खासकर बभनी, म्योरपुर और राबर्ट्सगंज में बहुतायत में है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी ये कभी-कभी दिख जाते हैं।
कोबरा को ही कहा जाता है नाग
सबसे बड़े वन क्षेत्र वाले रेणुकूट वन प्रभाग के डीएफओ मनमोहन मिश्र बताते हैं कि दुनिया के तीन सबसे खतरनाक सांप सोनभद्र में मौजूद हैं। यहां करैत बहुतायत मिलते हैं। करैत की दो प्रजातियां जिले में हैं। दूसरे नंबर पर कोबरा भी यहां पाया जाता है। इसमें सिर पर एक टोपी, दो टोपी व बगैर टोपी वाले सांप मिलते हैं। कोबरा को ही नाग भी कहा जाता है। तीसरा है रसेल वाइपर। इन सांपों में इतना विष होता है कि काटने के एक घंटे बाद मौत हो सकती है।
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खून जमा देता है विष में मौजूद हीमोटॉक्सिन
रसेल वाइपर के जहर में हीमोटॉक्सिन होता है, जो खून को जमा देता है। इससे एक घंटे में ही मौत हो जाती है। अगर जहर कम हो जाए तो भी उस जगह घाव हो सकता है, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है। रसेल वाइपर के अलावा कोबरा और करैत भी बेहद खतरनाक हैं। इनका जहर न्यूरोटॉक्सिन होता है, जो इंसान के स्नायु तंत्र को शून्य कर देते हैं, जिससे उसकी मौत हो जाती है। इसमें कोबरा की खासियत ये होती है कि वो जिस जगह पर डसता है, वहां सूजन हो जाती है जबकि करैत जिस जगह पर डसता है, वहां देखने से पता भी नहीं चलता।
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