हरितालिका तीज पर राबर्ट्सगंज वीरेश्वर महादेव मंदिर में पुजन अर्चन करती ब्रती महिलाएं।
सुहागन महिलाओं ने भादौ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रविवार को पति की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए तीज व्रत रखकर भगवान शंकर और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। व्रती महिलाएं निर्जल रहकर पूजन-अर्चन के साथ ही कथा सुनकर दिन और रात जागरण करते हुए कजली गीत गायन में अपना समय गुजारा।
सुहागन महिलाओं सुशीला, चंद्रशीला, सुमन, लक्ष्मी, सीता, सुनीता, संगीता, आशा का कहना है कि तीज व्रत में कौवा के बोलने से पहले ही बगैर बोले स्नान करके खीरा के फूल और खीरा के छोटे फल से बगैर वस्त्र बदले ही अर्घ्य दिया जाता है। उसके बाद भगवान शंकर और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ ही तीज व्रत की कथा सुनने का विधान है।
इसके अलावा दिन और रात भर व्रती महिलाएं शृंगार के साथ ही पूजन-अर्चन और कजली गीत के गायन में लगाती हैं। इसमें व्रती महिलाओं को सोना वर्जित है। मान्यता है कि माता पार्वती ने इस व्रत को किया था और सिर्फ शृंगार और पूजन-अर्चन में लीन होने की वजह से एक बूंद पानी तक ग्रहण नहीं किया था। उन्हें दिन और रात भर कुछ पता नहीं चला जब भोर में याद आया तब उन्होंने पारण किया। इसीलिए महिलाएं निर्जल रहकर व्रत करती हैं।
व्रत का पारण दूसरे दिन भोर में कौवा के बोलने से पहले स्नान करके अर्घ्य देने के बाद जिस महिला को जितने भाई हैं उतने दाना चना और एक दाना चना अगरासन निगलने के बाद ही पारण किया जाता है। जिसे भाई नहीं है तो वह सिर्फ एक दाना चना अगरासन ही निगलकर पारण करती हैं। पुरोहित पं. सुरेश कुमार मिश्रा ने कहा कि अबकी बार तृतीया रविवार को शाम 4:53 बजे तक ही है। इसकी वजह से दिन में ही महिलाओं ने पूजन-अर्चन किया।