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पानी के नाम पर धन की बंदरबांट

Mon, 04 Jul 2016 11:53 PM IST
सोनभद्र
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ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने के नाम सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। हैंडपंपों में सबमर्सिबल पंप लगाकर पानी टंकी लगाने के नाम पर अच्छी खासी धनराशि का भुगतान तो किया ही गया है, ग्राम पंचायत के पानी टैंकर को सिर्फ ट्रैक्टर से ढुलाई का बजट तीन से चार लाख अनुमोदित करा कर धनराशि के बंदरबांट किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि गहनता से जांच हुई तो बड़ा घपला सामने आ सकता है। 
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म्योरपुर की सभी 80 ग्राम पंचायतों में पानी संकट को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से हैंडपंपों में सबमर्सिबल पंप लगाकर ओवरहेड टैंक स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए दो लाख का बजट भी निर्धारित किया गया था। इसी तरह जलसंकट से ग्रस्त प्रत्येक ग्राम पंचायत को 14वें वित्त के आयोग के धन से ही पानी टैंकर खरीदने के लिए 95 हजार तक खर्च की अनुमति दी गई थी। इस टैंकर की ट्रैक्टर से ढुलाई करवा गांव के संकटग्र एरिया को पानी आपूर्ति देनी थी।
  बताते हैं कि एक दिन में किराए पर मय डीजल एक हजार खर्च होना है। अगर मार्च से जून तक नियमित आपूर्ति मान भी ली जाए, तो अधिकतम किराया सवा लाख के आसपास ही बनता है लेकिन ब्लाक के अफसरों ने कार्ययोजना अनुमोदन के समय बाजीगिरी करते हुए, महज ट्रैक्टर भाड़ा पर ही तीन से चार लाख का बजट स्वीकृत करा लिया। हैंडपंप के मरम्मत के नाम पर भी दो से तीन लाख का बजट अनुमोदित करा धन का बंदरबांट किया जा रहा है।
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    महज अनपरा ग्राम पंचायत में ही इस पर तीन लाख व्यय स्वीकृत है। जबकि अभी भी हैंडपंपों की खराबी और मरम्मत का भुगतान न होने की शिकायत बनी हुई है। पानी टंकी के नाम पर भी कई ग्राम पंचायतों में सिर्फ कोरमपूर्ति की गई है। बता दें कि ऊर्जांचल की अनपरा, बीजपुर, कुलडोमरी, कोटा, घरसड़ी सहित कई ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनका सालाना बजट पचास लाख से एक करोड़ या इससे भी अधिक है। 
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