सोनभद्र। जिले में सरकारी रुपये का फर्जीवाड़ा कर बंदरबांट की जा रही है। इसकी बानगी नगवां ब्लॉक के गांवों में देखी जा सकती है। दरअसल यहां जिस फर्म से स्टेशनरी खरीदी, फोटो स्टेट कराया, उसी से हैंडपंप, टैंकर की मरम्मत और रिबोरिंग तक करा दी गई।
दरअसल, नगवां ब्लाॅक के अधिकांश गांवों को एक साल से भी अधिक समय से हर घर नल योजना से संतृप्त बताया जा रहा है। बावजूद वहां ग्राम पंचायतों में पेयजल पर खर्च की गई धनराशि की पड़ताल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पूरी तरह संतृप्त बताई जा रहीं महज पांच ग्राम पंचायतों में ही 2025-26 में हैंडपंप मरम्मत सामग्री-मजदूरी पर 12.33 लाख रुपये से अधिक रकम खर्च कर दी गई है। वहीं तीन ग्राम पंचायतों में टैंकर परिचालन पर 5.26 लाख तो बोरिंग-रिबोर के नाम पर 5.24 लाख रुपये की धनराशि व्यय की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस व्यक्ति से हैंडपंप मरम्मत के काम के लिए मजदूरी करवाई गई। उससे ही टैंकर परिचालन का भी कार्य लिया गया है। इसी तरह जिस फर्म से हैंडपंप की रिबोरिंग कराई गई, उसी से टैंकर मरम्मत का भी कार्य कराया गया है।
हर घर नल योजना के तहत 191 ग्रम पंचायत के 364 राजस्व गांवों में पेयजल की नियमित जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है। इसमें 48 ग्राम पंचायतों वाले नगवां ब्लॉक के 37 ग्राम पंचायतों से जुड़े 83 राजस्व गांवों में नियमित जलापूर्ति की बात कही जा रही है। नगवां ऐसा ब्लॉक हैं, जिसके कई गांवों को पिछले वर्ष की सूची में ही हर घर नल योजना से संतृप्त बताया जा चुका है। शनिवार को इस ब्लाॅक में पाइप लाइन से होने वाली जलापूर्ति से संतृप्त बताए जा रहे पांच ग्राम पंचायतों में किए गए भुगतान का सच जांचा गया तो पता चला कि स्टेशनरी आपूर्ति करने वाली फर्में भी हैंडपंप मरम्मत, रिबोर, टैंकर मरम्मत, सबमर्सिबल मरम्मत, बोरिंग कार्य करने और उसका भुगतान लेने में लगी हुई हैं।
पाइप लाइन से संतृप्त पांच गांवों में कहां-कितनी खर्च की गई धनराशि
- वनबहुआर में हैंडपंप मरम्मत की सामग्री पर 1.10 लाख, मजदूरी पर 20 हजार, रिबोर पर 61289, टैंकर मरम्मत पर 18 हजार, टैंकर परिचालन पर 166970, सबमर्सिबल मरम्मत पर 18 हजार खर्च किए गए हैं।
- दरेंव ग्राम पंचायत में हैंडपंप मरम्मत की सामग्री पर 287750, बोरिंग पर 156997, टैंकर मरम्मत पर 19974, टैंकर परिचालन पर 1.98 लाख, सबमर्सिबल मरम्मत पर 39960, रिबोर पर 136747 रुपये व्यय किया गया है।
- देवरी मय देवरा ग्राम पंचायत में हैंडपंप मरम्मत की सामग्री पर 155607, मजदूरी पर 20 हजार, हैंडपंप फाउंडेशन की सामग्री पर 42880, मजदूरी पर 11085, सबमर्सिबल पंप मरम्मत पर 46725, रिबोर पर 169407 रुपये का भुगतान किया गया है।
- केवटम में हैंडपंप मरम्मत सामग्री पर 345407, मजदूरी पर 45 हजार, टैंकर मरम्मत पर 19980, टैंकर परिचालन पर 103540, सबमर्सिबल मरम्मत पर 69520 रुपये खर्च किए गए हैं।
- सुअरसोत खुर्द ग्राम पंचायत में हैंडपंप मरम्मत पर 195187, मजदूरी पर 23 हजार, कूप मरम्मत पर 119948, टैंकर मरम्मत पर 19945 रुपये का भुगतान हुआ है।
(नोट: भुगतान का विवरण मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज है।)
कहीं सदस्य को दिया मानदेय तो कहीं फोटो स्टेट करने वाले से बनवाया हैंडपंप:
केवटम ग्राम पंचायत में जिस फर्म से स्टेशनरी खरीदी गई, फोटो स्टेट कराया गया, उसी से हैंडपंप मरम्मत, टैंकर मरम्मत, सबमर्सिबल मरम्मत के लिए सामग्री आपूर्ति ली गई। इसी तरह दरेंव ग्राम पंचायत में जिस व्यक्ति से 13 हैंडपंपों की मरम्मत में मजदूरी का कार्य कराया गया, उसी से टैंकर चलवाकर 50100 का भुगतान कर दिया गया, जबकि यहां एक दूसरे व्यक्ति से भी टैंकर चलवाया जाना दिखाते हुए 147900 का भुगतान किया गया।
स्टेशनरी-फोटो स्टेट की दुकान से हुई हैंडपंप-बिल्डिंग मैटेरियल की आपूर्ति :
नगवां ब्लॉक में जिन फर्मों से हैंडपंप, बिल्डिंग मैटेरियल की सामग्री ली जा रही है, उसकी भौतिक स्थिति जांची गई। पता चला कि ब्लाॅक मुख्यालय पर एक ऐसी दुकान जिसकी पहचान फोटो स्टेट और स्टेशनरी दुकान की है, उससे अधिकांश ग्राम पंचायतों में हैंडपंप व बिल्डिंग मैटेरियल की सामग्री ली जा रही है। लोगों का दावा यह है कि यह सिलसिला पिछले कई सालों से चला आ रहा है।
हैंडपंप-टैंकर की आड़ में घपलेबाजी पर सवाल
हैंडपंपों की मरम्मत और टैंकर परिचालन पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब जिन ग्राम पंचायतों को पाइप लाइन पेयजलापूर्ति से पूरी तरह संतृप्त बताया जा रहा है, वहां जिस तरह से चंद माह पूर्व हैंडपंप-टैंकर मद में भुगतान की स्थिति सामने आई हैं, उसको देखते हुए बड़े स्तर पर घपलेबाजी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सच्चाई जांच-सत्यापन के बाद ही सामने आएगा लेकिन जिस तरह से महज पांच ग्राम पंचायतों में भुगतान के मामले में चौंकाने वाले स्थिति सामने आई है। उसको देखते हुए कहा जा रहा है कि विस्तृत जांच बड़ी गड़बड़ी का खुलासा करती नजर आ सकती है।
नगवां ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायतों में फिलहाल टैंकर परिचालन पर रोक लगाई गई है। कितना क्षेत्र हैंडपंप से और कितना पाइप लाइन पेयजलापूर्ति से आच्छादित है, कितने हैंडपंप चालू हैं, कितने खराब हैं इस संबंध में सभी ग्राम पंचायतों से रिपोर्ट तलब की गई है। जहां टैंकर की मांग आएगी, वहां खुद जाकर सत्यापन करेंगे। स्टेशनरी-फोटो स्टेट सामग्री के लिए पंजीकृत फर्मों से बिल्डिंग मैटेरियल की आपूर्ति के बारे में जानकारी के लिए सभी फर्मों से जुड़ा विवरण तलब किया गया है। जल्द ही खुद गांव-गांव जाकर इसका सत्यापन करेंगे। -अनिल सिंह, बीडीओ, नगवां।
जलनिगम की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में ग्राम पंचायत के कई मजरे-टोले ऐसे हैं, जहां अभी भी पाइप लाइन नहीं पहुंच पाया है। डीपीआर में भी कई मजरे-टोले छूटे हैं। इन इलाकों में जलापूर्ति के लिए हैंडपंप, टैंकर सहित साधनों की मदद पिछले वर्ष ली गई थी। भुगतान या फर्म चयन में अगर कोई गड़बड़ी है तो उसकी जांच कराई जाएगी। -नमिता शरण, जिला पंचायत राज अधिकारी।