एनजीटी की ओर से गठित कोर कमेटी के सदस्यों (स्वास्थ्य सब कमेटी) ने शुक्रवार को दुद्धी तहसील क्षेत्र के कई गांवों का दौरा कर प्रदूषण और मानव जीवन पर पड़ रहे दुष्प्रभाव की हकीकत जानी।
इस दौरान विकलांगता, स्मृतिलोप, चर्मरोग के मरीज तो मिले ही, कैंसर के बढ़ते प्रकोप, बांझपन, गर्भपात की बढ़ती शिकायतें टीम को भौचक करती रही।
प्रदूषण प्रभावित गांवों में बीमारी का प्रकोप इस कदर गहराया मिला कि दो दिनों में 13 गांवों का लक्ष्य लेकर चली टीम, पांच गांवों का ही निरीक्षण कार्य पूरा कर सकी।
इन गांवों से लैब परीक्षण के लिए मिट्टी और पानी के नमूने भी उठाए गए। देर होती देख अनपरा से सटे बेलवादह के लिए चली टीम शाम पांच बजे के करीब क्वांरी से ही लखनऊ के लिए वापस हो गई।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के चिकित्सक हिमांशु कुमार की अगुवाई वाली टीम शुक्रवार को सबसे पहले म्योरपुर ब्लाक के किरवानी गांव पहुंची।
यहां हीरामती, लालती, राजकुमारी आदि ग्रामीणों से रोगों के बारे में जानकारी ली। यहां फ्लोराइड के साथ ही आर्सेनिक के प्रकोप की स्थिति तो मिली ही, बांझपन, बीमारी की भी शिकायतें सामने आईं।
कई ग्रामीणों ने विकलांगता, कैंसर एवं अन्य बीमारियों की शिकायत की। इसी तरह खैराही, कुसुम्हा गांव का भी टीम ने निरीक्षण किया।
यहां के बाद टीम रेणुकूट पहुंची और यहां की रहवासी बस्ती के साथ ही आसपास के इलाके का जायजा लेकर जरूरी जानकारी हासिल की। डा. हिमांशु का कहना था कि शेष गांवों का निरीक्षण अब वह अपनी अगली विजिट में करेंगे।