अभावों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने अनुभव व जुगाड़ से नई खोज करने वाले लोगों की प्रतिभा को पहचान मिलेगी। असंगठित क्षेत्र के ऐसे नव प्रवर्तकों (अन्वेषक) की खोज के लिए शासन ने विशेष अभियान शुरू किया है।
इसके तहत जिला स्तर पर मेला लगाकर उनकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जाएगा। हर जिले से एक नव प्रवर्तक की खोज का पेटेंट कराने की भी तैयारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो कम पढ़े-लिखे और कम वैज्ञानिक समझ के बाद भी अपने काम को नए तरीके से कर रहे हैं।
उनका नवाचार दूसरों के लिए भी प्रेरणा का सबब बन जाता है। व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रोत्साहन के अभाव में उनकी प्रतिभा को पहचान नहीं मिल पाती, जबकि उनकी खोज समाज के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे ही नव प्रवर्तकों की खोज शुरू की है।
उन्हें मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान कर उनके माॅडल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से विकसित करने की कवायद है। इसके लिए जिला विज्ञान क्लब को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला स्तर पर प्रदर्शनी के जरिए विभिन्न क्षेत्र के नव प्रवर्तकों की खोज की जाएगी।
इन क्षेत्रों में ढूंढे जाएंगे नव प्रवर्तक
नव प्रवर्तकों की खोज दस क्षेत्रों में की जा रही है। आयुष विभाग के अंतर्गत औषधीय पौधों व जड़ी-बूटियों से सस्ती तकनीकी की दवा निर्माण करने वाले, कृषि क्षेत्र में माॅडल खेती, जैविक खेती करने वाले किसान, पंचायती राज विभाग के अंतर्गत अभावों और विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए जुगाड़ से बनाए गए मैकेनिकल उपकरण, कौशल विकास के तहत महिला समूह या बेरोजगार समूहों की ओर से बनाए गए उत्पाद, उद्योग विभाग में लघु स्टार्ट अप शुरू करने वाले नव प्रवर्तक शामिल हैं। इनके अलावा उद्यान, रेशम, पशुपालन, नेडा, एनआरएलएम व माध्यमिक, तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के नव प्रवर्तकों की खोज की जाएगी।