संत कीनाराम सीनियर सेक्रेंडी स्कूल मुंसी प्रेमचंद्र की जयंती पर पुष्प अर्पित करते प्राचार्य डॉ.
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सोनभद्र। मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं में कृषि और किसान का बेजोड़ संगम मिलता है। मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन का संपूर्ण खट्टा-मीठा अनुभव लेकर रचना की है। उनकी रचनाओं में हमें हिंदुस्तान की वास्तविक झांकी देखने को मिलती है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हे उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। उक्त बातें संत कीनाराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गोपाल सिंह ने कहीं।
वे संत कीनाराम सीनियर सेकेंड्री पब्लिक स्कूल में शनिवार को मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन के कार्यक्रम पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के पात्र खेत-खलिहान, गांव-गिराव, ताल-चलइया और भारतीय परिवेश से संबद्ध है। अपनी रचनाओं में उन्होंने गुलाम भारत की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की है। अमीर का ऐश और गरीब की गरीबी क्या चीज होती है, इसका लेखा-जोखा हमें गोदान में मिलता है। स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रेमचंद ने बंदूक नहीं कलम को हथियार बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। कहते हैं गोदान का नायक होरी कोई और नही स्वयं प्रेमचंद है। एक व्यक्ति अच्छा घर अच्छा परिवार, अच्छी फसल और अच्छा जानवर के साथ जीवन जीता है और मरता है तो कर्ज में मरता है। भारतीय परंपरा के अनुसार उसे मरने से पहले गोदान किया जाता है, जो मुंशी प्रेमचंद के गोदान का उदाहरण है। जयंती की पूर्व संध्या पर मुंशी प्रेमचंद, माँ सरस्वती, बाबा कीनाराम के चित्र पर धूप-दीप, माल्यार्पण एवं पूजन किया गया। इस मौके पर मनोज श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य रामप्रवेश मौर्या, विजय मिश्रा, मनोज, सरोज सिंह आदि उपस्थित रहे।