बीजपुर। म्योरपुर खंड शिक्षा क्षेत्र अंतर्गत कंपोजिट विद्यालय बीजपुर में सस्पेंड प्रधानाध्यापिका की ओर से वार्षिक ग्रांट के रुपये निकाले जाने का मामला सामने आया है। बृहस्पतिवार को करीब एक लाख रुपये निकाल लिए जाने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि रुपये कैसे निकले, इसकी जानकारी नहीं है, जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
परिषदीय विद्यालय की रंगाई पुताई, हैंडवाश, स्टेशनरी, वायरिंग, पंखा सहित अन्य कामों के लिए शासन की तरफ से वार्षिक ग्रांट हर विद्यालय में भेजा जाता है। पिछले साल नवंबर में 25 प्रतिशत धन की निकासी प्रधानाध्यापक आशा रानी की तरफ से की गई थी। इसका समुचित इस्तेमाल न करने के आरोप और अन्य कमियों के कारण खंड शिक्षा अधिकारी म्योरपुर विश्वजीत कुमार ने जनवरी महीने में प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया था। इसके कारण वह विद्यालय में सेवा व संचालन नहीं कर सकती हैं। आरोप है कि निलंबित प्रधानाध्यापक व पीपीए ऑपरेटर की मिलीभगत से बृहस्पतिवार को करीब एक लाख रुपये निकाल लिए गए। एसएमसी अध्यक्ष सुधा देवी को बताया गया कि विद्यालय के खर्च के लिए करीब एक लाख रुपये आए हैं, जिसे अभी निकालना जरूरी है। नहीं तो पैसा वापस हो जाएगा तो दिक्कत होगी। एसएमसी अध्यक्ष ने बताया कि बृहस्पतिवार को प्रधानाध्यापिका आशा रानी के साथ पीपीए ऑपरेटर मनोज दुबे मेरे घर आए थे और मुझे लेकर म्योरपुर स्थित बैंक गए और वहां ले जाकर साइन करा लिया। वहीं, आशा रानी का कहना है कि विद्यालय में वायरिंग, पंखे सहित अन्य काम कराए गए हैं, जिसका भुगतान किया गया है।
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निलंबित प्रधानाध्यापक ग्रांट के पैसे नहीं निकाल सकतीं। पता नहीं कैसे पैसे निकाले गए हैं। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - विश्वजीत कुमार, बीईओ म्योरपुर।