कोयला खदानों में पानी भरने और दुधीचुआ-शक्तिनगर रूट पर बहे रेलवे ट्रैक दुरुस्त करने का काम दूसरे दिन शुक्रवार को भी शुरू नहीं हो सका। इससे दुद्धीचुआ से कोयला उत्पादन ठप रहा। इसके चलते तीन परियोजनाओं (अनपरा, लैंको, एनटीपीसी शक्तिनगर) में 3300 मेगावाट कम बिजली उत्पादन हुआ। एक-दो दिन में आपूर्ति न सुधरने पर इसमें और गिरावट हो सकती है। ओबरा परियोजना को लगातार तीसरे दिन कोयला नहीं मिला। इससे लखनऊ से दिल्ली तक खलबली मची है।
बारिश के चलते पहले से ही कोयले का उत्पादन गिरा हुआ है। इसी बीच बुधवार की रात दुधीचुआ-शक्तिनगर रूट पर खड़िया के पास रेलवे लाइन बह गई। यह रेल लाइन रेलवे के अनपरा-शक्तिनगर लाइन से जुड़ी हुई है, लेकिन इसका अधिकार एनसीएल के पास है। दलदल के कारण एनसीएल की तरफ से मरम्मत की शुरुआत नहीं हो सकी। इससे लोडिंग हब दुद्धीचुआ से शुक्रवार को भी कोयला उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। इसका परिणाम यह हुआ कि देर शाम तक 2015 मेगावाट वाली एनटीपीसी शक्तिनगर में 1037 और 2630 मेगावाट वाली अनपरा परियोजना में 725, बारह सौ मेगावाट वाली लैंकों में 725 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।
अनपरा सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि देर रात तक छह रैक कोयला मिलने की संभावना है। इससे कुछ स्थिति सुधरेगी, लेकिन फिलहाल परियोजना की पांच सौ मेगावाट की चौथी, पांचवीं और छठीं इकाई को आधे लोड पर चलाया जा रहा है। शेष को कोयले की उपलब्धता पर्याप्त होने तक बंद रखा गया है। लैंको के महाप्रबंधक सतीश कुमार ने कहा कि स्टाक शून्य हो चुका है। जो कोयला शुक्रवार को मिला, उससे किसी तरह आठ सौ मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। ओबरा परियोजना के एक्सईएन कोल एसपी यादव ने बताया कि लगातार तीसरे दिन कोयला नहीं मिला। एक रैक देर रात तक मिलने की उम्मीद है।