राजकीय इंटर कॉलेज खुज्झा में शासन ने एक प्रवक्ता समेत चार शिक्षकों की तैनाती की है। यह विद्यालय अभी बना ही नहीं है। कोर्ट के स्टे के कारण अधूरा काम कब तक पूरा होगा, यह भी तय नहीं है। ऐसे में वहां तैनात शिक्षक कैसे काम करेंगे, इसे लेकर विभाग भी पशोपेश में है।
जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और प्रवक्ताओं के करीब 50 फीसदी पद खाली हैं। कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां सिर्फ एक या दो शिक्षक हैं। शिक्षकों के अभाव में पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित है।
नए शिक्षण सत्र से छह नए राजकीय हाईस्कूल और एक मॉडल इंटर कॉलेज के संचालन से चुनौती और बढ़ी है। समस्या के समाधान की दिशा में लगाता शिक्षकों के तैनाती की मांग उठती रही है। पिछले दिनों शासन ने जिले में चार प्रवक्ता और 10 सहायक अध्यापकों की तैनाती की है।
इन्हें विभिन्न विद्यालयों में तैनात किया गया है। सबसे ज्यादा चार नियुक्ति राजकीय इंटर कॉलेज खुज्झा में हुई है। यहां हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान के सहायक अध्यापक और कॉमर्स के प्रवक्ता को नियुक्ति दी गई है।
यह वह विद्यालय है, जो अभी धरातल पर चालू ही नहीं हुआ है। कोर्ट के आदेश से पिछले कई वर्षों से इसके निर्माण पर रोक लगी है। लिहाजा इसका संचालन भी अभी शुरू होने की उम्मीद नहीं है।
ऐसे में चार शिक्षकों की ज्वाइनिंग और काम कराने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसी अन्य स्कूलों में इनकी तैनाती होती तो वहां पठन-पाठन की व्यवस्था सुचारू बनाने में सहूलियत होती।
निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेज खुज्झा में एक प्रवक्ता समेत चार शिक्षकों की तैनाती हुई है। इस विद्यालय का निर्माण स्थगन आदेश से रुका है। यहां तैनाती पाए शिक्षकों को जिले के अन्य कम शिक्षक वाले विद्यालयों में मूल रूप से रिक्त पदों पर तैनात करने के लिए शिक्षा निदेशक को पत्राचार किया जा रहा है।
-जयराम सिंह, डीआईओएस।