राख बांध पर पूर्ण रूप से निर्मित हजार मेगावाट वाली अनपरा डी परियोजना चुनौतियों की परियोजना बनी हुई है। स्थिति यह है कि पांच सौ मेगावाट वाली दूसरी इकाई उत्पादन पर तो अप्रैल में ही ली जा चुकी है लेकिन अभी तक इसे कामर्शियल लोड देना संभव नहीं हो सका है। वहीं कामर्शियल लोड पर आ चुकी पांच सौ मेगावाट वाली पहली इकाई अभी बंद पड़ी है, जिसे दो-तीन दिन में उत्पादन पर आने की संभावना जताई जा रही है।
वर्ष 2008 में निर्माण के समय से ही यह परियोजना चुनौतियों से जूझ रही है। कभी मजदूरों का आंदोलन तो कभी संविदा कंपनियों की लापरवाही परियोजना के किसी न किसी काम में देरी का कारण बनती रही है। 31 मार्च 2015 को सीएम अखिलेश यादव ने अनपरा आकर परियोजना का लोकार्पण किया और उनके साथ मंच साझा कर रहे भेल के सीएमडी अतुल सोप्ती ने परियोजना की दोनों इकाइयों से जल्द नियमित उत्पादन का भरोसा दिलाया तो लोगों को लगा कि जून 2016 तक परियोजना से लगातार एक हजार मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी
लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि भेल के साथ परियोजना अधिकारियों की मेहनत और शासन स्तर से मशक्कत के बाद परियोजना की पहली इकाई कामर्शियल लोड पर आ चुकी है। वहीं पांच सौ मेगावाट की दूसरी इकाई भी उत्पादन पर है लेकिन अब तक इसे कामर्शियल लोड पर देना संभव नहीं हो सका है।वहीं दोनों इकाइयों का पूर्ण क्षमता से संचालन कर अनपरा डी से लगातार एक हजार मेगावाट बिजली पैदा करना भी अभी स्वप्न बना हुआ है।
जबकि उच्च स्तर से 14 अगस्त तक दोनों इकाइयों से पूर्ण क्षमता से संचालन का लक्ष्य तय हुआ था और अगस्त अंत तक दूसरी इकाई के कामर्शियल लोड पर आने की उम्मीद जताई गई थी।