अनपरा डी और ओबरा परियोजना के कार्यों में देरी को लेकर आलोचना झेल चुकी भेल की लेटलतीफी अब प्रदेश के सबसे बड़े पन बिजली घर पर भारी पड़ने लगी है। अनुरक्षण पर चल रही पचास मेगावाट की दूसरी और इसी क्षमता की छठीं इकाई को समय सीमा तय होने के बाद भी दिसंबर तक उत्पादन पर ले पाना संभव नहीं हो सका है। अब जून तक इन इकाइयों से उत्पादन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इसको देेखते हुए 16 दिसंबर को लखनऊ में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें उत्पादन की नई समय सीमा तय होगी।
एशिया के बड़े बांधों में एक रिहंद डैम पर तीन सौ मेगावाट का जल विद्युत गृह स्थित है। इसकी चार इकाइयां चालू हालत में हैँ। दूसरी और छठीं इकाई को अनुरक्षण के लिए भेल को सौंपा। गया है। सात माह पूर्व रिहंद के दौरे पर आए जल विद्युत निगम के एमडी विशाल चौहान ने अनुरक्षण में देरी पर गहरी नाराजगी जताई थी और नवंबर अंत तक दूसरी और दिसंबर अंत तक छठीं इकाई को उत्पादन पर लाने की समय सीमा तय की थी।
भेल की तरफ से इस समय सीमा में इकाइयों को उत्पादन पर ला देने की हामी भी भरी गई थी लेकिन अब तक दोनों में से एक भी इकाई उत्पादनरत नहीं हो सकी है। सूत्र बताते हैँ कि इसको लेकर जल विद्युत निगम की तरफ से कड़ा एतराज जताया गया है। वहीं भेल के शीर्ष अधिकारियों और ऊर्जा सचिव संजय अग्रवाल के बीच 16 दिसंबर को लखनऊ में बैठक रखी गई है। इसमें दोनों इकाइयों को उत्पादन पर लाने की समय सीमा निर्धारित करने के साथ जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे। उधर, रिहंद जल विद्युत गृह के अधीक्षण अभियंता शैलेष सिंह ने बताया कि स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। 16 दिसंबर की बैठक में जो समय सीमा तय होगी या निर्देश मिलेगा, उसके अनुरुप कार्रवाई काम होगा।