महज पांच हजार के बकाए पर आम उपभोक्ताओं के खिलाफ आरसी जारी करने वाले बिजली विभाग की करोड़ों की रकम सरकारी विभाग दबाकर बैठे हैं। महज अनपरा-शक्तिनगर क्षेत्र में साढ़े चार करोड़ से अधिक की रकम सरकारी महकमों के यहां बकाया है। इसको लेकर कई बार नोटिस देने के साथ ही बिजली काटी जा चुकी है लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हो सका है। अगर साढ़े चार करोड़ मिल जाए तो एलटी लाइन की जगह तार बिछाकर हर माह लगभग 18 लाख यूनिट बिजली की खपत कम की जा सकती है।
औद्योगिक परिक्षेत्र होने के नाते अनपरा-शक्तिनगर परिक्षेत्र में बिजली की खपत भी अच्छी खासी है। एक साल के आंकड़े पर ध्यान दें तो औसतन चालीस लाख यूनिट बिजली की खपत प्रति माह है। इसमें करीब 26 लाख यूनिट बिजली लाइन हानि (एंगीग्रेटेड ट्रांसमिशन एंड कामर्शियल लास) में है। अप्रैल माह के आंकड़े पर ध्यान दें तो महज अनपरा फीडर पर ही करीब बीस लाख यूनिट खर्च हो गई। लाइन लास का आंकड़ा भी यहां आठ लाख से पार रहा।
उधर, विद्युत वितरण निगम के अवर अभियंता विमलेश कुमार सिंह भी इसकी पुष्टि करते हैं। बताते हैं कि चार करोड़ से अधिक की रकम महज अनपरा (डिबुलगंज) संयुक्त चिकित्सालय पर बाकी है। इसी तरह शक्तिनगर क्षेत्र स्थित पावर प्लांट की ओर से संचालित स्कूल, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, आरओ प्लांट पर बीस लाख, ककरी परियोजना के आरओ प्लांट पर तीन लाख, अनपरा स्थित परियोजना के आरओ प्लांट पर सवा दो लाख, प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर दस लाख के लगभग बकाया है।
विमलेश का दावा है कि अगर यह रकम उन्हें मिल जाए वह पूरे अनपरा-शक्तिनगर परिक्षेत्र की एलटी लाइन को केबल लाइन में बदल देंगे। इससे हर माह औसतन 18 लाख यूनिट बिजली बचेगी यानी सीधे-सीधे 72 से 90 लाख तक की मासिक बचत।