जिले में पांच हजार से अधिक आबादी वाली बड़ी ग्राम पंचायत सचिवालयों के रिकार्ड को ऑनलाइन करने की शासन की मंशा अधूरी रह गई। 26 ग्राम पंचायतों में कंप्यूटर तो भेजे गए लेकिन आपरेटरों की नियुक्ति न होने के नाते वे धूल फांक रहे हैं। तमाम ग्राम पंचायतों से कंप्यूटर तक गायब हो चुके हैं। ऐसे में आम लोगों को सरकार की सेवाओं का आनलाइन फायदा नहीं हो पा रहा है और लोग सचिवों का चक्कर काटने के लिए विवश हैं।
यूपी सरकार ने जिले में पांच हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय बनाने का निर्देश दिया था। इसके तहत इन सचिवालयों में कंप्यूटर लगना था और उन्हें ऑनलाइन करना था। इसमें ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों और उनके विभागों की कार्यप्रणाली ऑनलाइन करनी थी, ताकि जनता को कुटुंब रजिस्टर की नकल लेने से लेकर अन्य कार्यों के लिए ग्राम पंचायत सचिवों का चक्कर न काटे। लेकिन सरकार की यह योजना अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी है। पांच हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतें कोटा, पनारी, जुगैल, कुलडोमरी, अनपरा, परासी, सुकृत, मधुपुर, बहुआरा, सलखन समेत करीब 26 ग्राम पंचायतों में पंचायत राज विभाग की ओर से पूर्व में कंप्यूटर भेजा गया था। लेकिन इनमें से ज्यादातर पंचायतों में अब कंप्यूटर नहीं है। ये कहां हैं इसके बारे में विभाग भी सुधि नहीं ले रहा है।
चर्चा है कि कुछ कंप्यूटर प्रधानों के यहां पड़े हैं तो कुछ ब्लॉकों पर लगा दिए गए हैं। विभाग के अफसर गांवों में दौरे पर जाते हैं तो इस बात की जांच नहीं करते कि जिन बड़ी ग्राम पंचायतों को विभाग से कंप्यूटर दिए गए आखिरकार वे कहां पड़े हैं। ग्राम सचिवालय शुरू न होने और पंचायतों को ऑनलाइन न किए जाने के नाते ग्रामीणों को अब भी सेक्रेटरियों का चक्कर काटने के लिए विवश होना पड़ रहा है। पंचायत से जुड़ी सेवाएं ऑनलाइन कब होंगे इसको लेकर विभाग के अफसर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं होते।