सोनभद्र। नाबालिग का बेरहमी से कत्ल करने के मामले में किशोर न्याय बोर्ड के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने भी जमानत देने से इंकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट/बाल न्यायालय अमित वीर सिंह की अदालत ने कहा कि हत्या बड़ी क्रूरता से की गई है। इसलिए नाबालिग होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
प्रकरण रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के डोमरिया ग्राम पंचायत स्थित पथरहिया बस्ती से जुड़ा हुआ है। रमेश बिंद ने 18 अप्रैल को मुकदमा दर्ज कराया था। उसने तहरीर में बताया था कि पथरहिया में रहने वाला किशोर 17 अप्रैल की रात साढ़े नौ बजे उसके घर आया और उसके 17 वर्षीय पुत्र को जगाकर ले गया। चुआंड़ बांध के पास खदान मार्ग पर ले जाकर चाकू मारते हुए हत्या कर दी। चीख-पुकार पर जब तक लोग पहुंचे आरोपी हत्या कर भाग निकला। 112 नंबर डायल करने पर पुलिस पहुंची तो देखा कि मौके पर शव पड़ा हुआ था। हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने आरोपी/बाल अपचारी को गिरफ्तार कर चालान कर दिया था। पिता की तरफ से किशोर न्याय बोर्ड में जमानत के लिए अर्जी लगाई गई थी। बोर्ड ने वारदात को गंभीरता को देखते हुए नौ सितंबर को किसी तरह की राहत देने से इंकार कर दिया था।
बोर्ड के फैसले को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी गई। विशेष न्यायाधीश बाल न्यायालय ने मामले की सुनवाई की। पाया कि बाल अपचारी की उम्र शैक्षिक अभिलेख के अनुसार लगभग 16 वर्ष सात माह है। उस पर हत्या का आरोप है। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त चाकू और आरोपी के रक्त रंजित कपड़े बरामद किए गए हैं। वारदात के बाद भागते वक्त जिन लोगों ने उसे देखा उन्होंने गवाही भी दी है।
पीएम रिपोर्ट में सामने आया कि मृतक के शरीर पर चाकू के 12 निशान थे। उसे इस कदर बेरहमी से मारा गया था कि उसकी अंतड़ियां भी बाहर निकल गईं थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की क्रूरतापूर्ण वारदात के बाद भी बाल अपचारी को जमानत पर रिहा किया गया तो न्याय का उद्देश्य विफल हो जाएगा। न्यायालय ने फिलहाल किसी तरह की राहत देने से इंकार कर दिया।