रेशम विभाग की ओर से किसानों की आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से क्षेत्र के उन्नतशील रेशम किसानों के लिए एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन बनवासी सेवा आश्रम के विचित्रा सभाकक्ष में बुधवार को किया गया। संगोष्ठी में किसानों को रेशम की खेती की उन्नत किस्म, तरीकों, पशुपालन आदि की जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक रामलखन ने कहा कि बीज स्वस्थ होना चाहिए तभी अच्छे कोया का निर्माण हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चा अच्छा होगा तभी वह पहलवान बन सकता है। उन्होंने रेशम किट पालकों को उन्नत खेती के बहुत से उपाय बताए। अध्यक्षता करते हुए शुभा बहन ने कहा कि रेशम की खेती से आजीविका बढ़ाई जा सकती है लेकिन इस खेती में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कार्यक्रम में रेशम किटपालकों को रेशम की खेती से जुड़ी बारीकियों के बारे में रेशम विकास विभाग से सेवानिवृत्त हुए निर्मल कुमार गुप्त ने जानकारी दी। उत्कृष्ट खेती करने वाले पांच किसानों व दो सेवानिवृत्त साथियों ओमप्रकाश व निर्मल कुमार गुप्ता को सम्मानित किया गया। इस दौरान विमल भाई, केवला दूबे, लालबहादुर भाई, देवनाथ भाई, प्रदीप सिंह, नीरा बहन व रेशम विकास विभाग के सहायक निदेशक रेशम रणबीर सिंह, सहायक रेशम विकास अधिकारी सूबेदार, सहायक रेशम विकास अधिकारी पंकज कुमार आदि उपस्थित रहे। संगोष्ठी में मुनगाडीह, चैनपुर, देवरी, मुर्धवा, रजनी बेलहत्थी, जोगीडीह, मलदेवा, गरदरवा, बोकराखाड़ी आदि गांवों के कुल 225 रेशम की खेती से जुड़े किसान शामिल हुए। संचालन शिवशरण भाई ने किया।