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अंतिम दिन दस लाख के पुराने नोट जमा

Fri, 30 Dec 2016 11:13 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
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बैंक की शाखा में खाताधारकों की लगी भीड़।
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500 और एक हजार रुपये के चलन से बाहर होने की घोषणा को 52 दिन पूरे हो गए। लेकिन जनपद में लोगों की समस्या जस की तस है। खासकर पिछड़े आैर नक्सल प्रभावित इलाकों में अब भी लोग नोटबंदी से उबर  नहीं पाए हैं। बाजारों में अब भी खुदरा का गंभीर संकट बना हुआ है। शुक्रवार को बैंकों में पुराने एक हजार और पांच सौ के दस लाख रुपये जमा कराए गए। ठंड के चलते बैंकों में भीड़ आम दिनों के अपेक्षा काफी  कम दिखी।
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आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 एवं 1000 के पुराने नोट बंद करने की घोषणा करते हुए कहा कि था कि 50 दिनों में बैंकों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। उन्होंने 30 दिसंबर तक पुराने नोटों को बैंकों में जमा करने की छूट दी थी। इस लिहाज से शुक्रवार पुराने नोट बैंकों में जमा करने का आखिरी दिन था। हालांकि शुक्रवार को जनपद में मौसम ने अचानक करवट ली और सर्द हवाओं के कारण तापमन गिर कर पांच डिग्री तक पहंुच गया।इससे लोग बैंकों तक पहंुचने से कतराते रहे।


ठंड के कारण बैंकों में पुराने नोट जमा करने के लिए लोगों की भीड़ नहीं दिखी लेकिन रुपये निकालने के लिए लोग लाइन में खड़े रहे। अब भी बैंकों से सप्ताह में लोगों को करंट एकाउंट से 50 हजार एवं सेविंग एकाउंट से 24 हजार से अधिक नहीं मिल रहा है। राबर्ट्सगंज नगर में स्थित तीन-चार बैंकों को छोड़कर अन्य बैंकों में अब भी दस हजार रुपये से अधिक नहीं मिल रहा हैै।
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एटीएम से दो हजार रुपये ही निकल रहा है। अधिकांश एटीएम से दो हजार की ही करेंसी निकल रही है। जिससे बाजार में खुदरा का संकट बना हुआ हैै। ग्रामीण इलाकों के बैंकों में भी लोगों को जरूरत के अनुसार रुपये नहीं मिल रहे हैैं। लीड बैंक के मैनेजर करुणेश कुलश्रेष्ठ ने कहा कि आरबीआई के निर्देशानुसार बैंकों से लोगों को रुपये मिल रहे है। शुक्रवार को पुराने पांच सौ व एक हजार के करीब दस लाख रुपये बैंकों में जमा हुए है।
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