अनपरा संयुक्त चिकित्सालय की बिल्डिंग।
संयुक्त चिकित्सालय अनपरा (डिबुलगंज) सौ बेड का अस्पताल है लेकिन यहां सुविधाएं सीएचसी की भी मयस्सर नहीं है। न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं, ना ही जांच के समुचित इंतजाम। बिजली कटने पर प्रसव जैसी आवश्यक सेवा के लिए लैंप का सहारा लेना पड़ता है। इसको लेकर आकाश पांडेय आदि की शिकायत पर डीएम सीबी सिंह ने सीएमओ कृष्णगोपाल सिंह को अविलंब जरूरी पहल करने के निर्देश दिए हैं।
देश के तीसरे सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र की संज्ञा पा चुके ऊर्जांचल के हब अनपरा (डिबुलगंज) में 20 मार्च 83 को सूबे के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री लोकपति त्रिपाठी ने सौ बेड के राजकीय संयुक्त चिकित्सालय की आधार शिला रखी। 15 दिसंबर 2011 को तत्कालीन सीएम राजनाथ सिंह ने इसका लोकार्पण किया। उस समय यहां ईसीजी जांच के साथ ही मेडिसीन और सर्जरी दोनों की बेहतर सुविधाएं देने का भरोसा भी दिया गया था लेकिन अब तक यहां कुछ चिकित्सकों की तैनाती और मलेरिया-टाइफाइड जांच के अलावा कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है।
इसके चलते जरा भी गंभीर स्थिति होने पर लोगों को जिला अस्पताल या फिर वाराणसी का रुख करना पड़ता है। इसके चलते लोगों को झोलाछाप चिकित्सकों के भी शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। वहीं सड़क हादसों में घायलों को तत्काल इलाज न मिलने से अक्सर किसी न किसी की मौत होती रहती है। सप्ताह भर पूर्व बैरपान में हुए हादसे में तत्काल इलाज न मिल पाने के कारण अनपरा परियोजना में तैनात एई नर्बदे को जान गवांनी पड़ी थी। पिछले दिनों चौपाल के लिए अनपरा आए डीएम का ग्रामीणों ने भी इस तरह ध्यान आकृष्ट कराया था।