माध्यमिक शिक्षा विभाग में अंतर जनपदीय तबादले की आस लगाए ज्यादातर शिक्षकों की उम्मीद पहले चरण में ही टूट गई है। विभागीय मानकों पर सत्यापन के दौरान 86 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
जिले से सिर्फ 63 प्रार्थना पत्र ही अग्रसारित हुए हैं। उन पर उच्च स्तर से निर्णय होना है। तबादले का लाभ भी शिक्षकों को तभी मिलेगा, जबकि उनकी जगह कोई दूसरा शिक्षक यहां आएगा।
जिले में 65 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के छह सौ से अधिक पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष 50 फीसदी पदों पर ही तैनाती है।
शिक्षकों की कमी से जूझ रहे जिले के कई विद्यालयों का हाल ऐसा है कि वहां जरूरी विषयों के शिक्षक भी नहीं है या फिर एक ही शिक्षक कई कक्षाओं को पढ़ा रहे हैं। भौगोलिक जटिलता के कारण यहां शिक्षक आना भी नहीं चाहते।
इसके चलते लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त बने हुए है। इस बीच अंतर जनपदीय तबादले की प्रक्रिया शुरू होने पर 149 शिक्षकों ने दूसरे जिले में जाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन किया है।
आवेदन पत्र के साथ अपनों की बीमारी, पति-पत्नी की नौकरी या अन्य तरह की दलील भी दी गई है। वह ऊंची पैरवी भी लगा रहे हैं। तबादले के लिए विभाग की ओर से निर्धारित मानकों पर सत्यापन के पहले चरण में ही 86 आवेदन निरस्त हो गए हैं।
सिर्फ 63 आवेदनों को ही जिले से अग्रसारित किया गया है। अब इन पर फैसला 12 जून तक उच्चाधिकारियों के स्तर से होना है। सबसे बड़ी समस्या है कि अगर इतनी संख्या में शिक्षकों के तबादले मंजूर हुए तो जिले के स्कूलों में पठन-पाठन व्यवस्था का बंटाधार होना तय है।
एक तरफ आकांक्षी जिले में माध्यमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए नए स्कूल खोलने और नामांकन बढ़ाने की कवायद चल रही है तो दूसरी ओर पहले से तैनात शिक्षकों के तबादले से पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी।
तबादले के लिए ऑनलाइन माध्यम से कुल 148 आवेदन आए थे। इसमें पहले चरण के सत्यापन में मानकों को पूरा न करने के कारण 86 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। शेष 63 आवेदनों में भी तबादला से पहले प्रतिस्थानीय के आने के बाद ही शिक्षक को कार्यमुक्त किया जाएगा। पठन-पाठन की व्यवस्था को सुचारू बनाना प्राथमिकता में है।
-जयराम सिंह, डीआईओएस।