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भाजपा कार्यकर्ताओं की गुटबंदी पार्टी प्रत्याशियों पर पड़ी भारी

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सोनभद्र। जिले की सीमा से सटे राज्य झारखंड में विधानसभा चुनाव में झटका खाने के बाद भी भाजपा नेताओं ने सबक नहीं लिया और गुटबंदी में लगे रहे। परिणामस्वरूप अब जिले की दो नगर पंचायतों रेणुकूट और चोपन में चेयरमैन के रिक्त चल रहे पदों पर हुए उपचुनाव में भी पार्टी प्रत्याशियों को करारी हार का सामना करना पड़ा है। रेणुकूट में तो भाजपा प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा पाए। हालांकि चोपन में भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे लेकिन विजयी प्रत्याशी से वोट का अंतर ज्यादा रहा। चोपन नगर पंचायत में जीत हासिल करने वाली फरीदा बेगम को 2656 और दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के सत्यप्रकाश को 2186 मत मिले। यानि निर्दल फरीदा भाजपाई सत्यप्रकाश से 470 वोट ज्यादा पाने में सफल रहीं। जबकि रेणुकूट में भाजपा की शारदा खरवार को मात्र 51 और विजयी प्रत्याशी निशा देवी को 3476 वोट मिले।
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उधर, राबर्ट्सगंज के सांसद व भाजपा नेता पकौड़ी लाल कोल ने दोनों नगर पंचायतों में पार्टी प्रत्याशियों के हार का ठीकरा गुटबंदी में शामिल नेताओं व जिलास्तरीय पदाधिकारियों पर फोड़ा। कहा, जिले स्तर के पदाधिकारियों ने उन्हें व क्षेत्रीय विधायकों को प्रचार की जिम्मेदारी देने तक की जहमत नहीं उठाई। क्षेत्र में प्रचार के लिए कहा तक नहीं गया। यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर गुटबंदी है। जिसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ा है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि चोपन और रेणुकूट दोनों जगहों पर विजयी प्रत्याशियों को सहानुभूति का लाभ मिला।
बता दें, चोपन में चुनाव जीतीं फरीदा बेगम नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन इम्तियाज की पत्नी हैं। जिनकी वर्ष 2018 में हत्या हो गई थी। इसी तरह से रेणुकूट में चुनाव जीतीं निशा देवी पूर्व चेयरमैन शिव प्रताप सिंह की पत्नी हैं, जिनकी वर्ष 2019 में हत्या हुई थी। हार की सीधे तौर पर जिम्मेदारी लेने की बजाय सहानुभूति का लाभ मिलने की बात भाजपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अजित चौबे ने भी कही। उन्होंने पार्टी में गुटबंदी से इंकार किया। कहा कि चोपन में मजबूत दावेदारी की उम्मीद थी जबकि रेणुकूट में इतना कम वोट मिलने की उम्मीद नहीं थी। कहां चूक हुई और हार के कारणों पर आत्ममंथन किया जा रहा है। उधर, सदर विधायक भूपेश चौबे ने यह कहकर इस बारे में कुछ भी बोलने से परहेज किया कि यह उनके क्षेत्र से जुड़ा मामला नहीं है।
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उधर, पार्टी नेताओं के बीच यह भी चर्चा तेज हो गई है कि जनवरी के पहले सप्ताह में राबर्ट्सगंज में आयोजित कार्यकर्ता संगम में सुनील बंसल और जिले के प्रभारी मंत्री सतीश द्विवेदी जब यहां आए थे तो पार्टी नेता उन्हें अंतिम समय तक घेरे रहे। इन दोनों नेताओं को किसी ने भी यह सुझाव तक नहीं दिया कि नगर पंचायत क्षेत्र में जाकर पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में कुछ जगहों पर वोट मांग लें। हालांकि इन दोनों नेताओं ने अपनी तरफ से भी चुनाव क्षेत्र में प्रचार के लिए जाने की जहमत नहीं उठाई। अब जबकि दोनों नगर पंचायतों में पार्टी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है तो यह चर्चा तेज हो गई है कि गुटबंदी पर लगाम लगाकर पार्टी की मजबूती की दिशा में अभी से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो सकती है।
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