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वर्षों से जल रही मां ज्वाला की अखंड ज्योति, दर्शन को उमड़ते हैं श्रद्धालु

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शक्तिनगर। शक्ति की उपासना का विशेष काल नवरात्र सोमवार से आरंभ हो रहा है। इस दिन देवी के विभिन्न रूपों के दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ऊर्जांचल में स्थित मां ज्वालामुखी का मंदिर चार राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यूपी के अलावा सीमावर्ती मप्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। मंदिर में मां ज्वाला की अखंड ज्योति वर्षों से जल रही है।
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आदिवासियों द्वारा सैकड़ों साल से पूजी जा रही मां ज्वालामुखी देवी का जल, जंगल व जमीन से गहरा नाता रहा है। यही वजह है कि मां को प्रसन्न करने के लिए आदिवासी भक्त देवी के चरणों में जिह्वा चढ़ाते रहे हैं। बदले परिवेश में इस प्रथा पर रोक जरूर लगी, लेकिन यदा कदा ऐसे मामले आज भी सुनने में आते हैं। ज्वालामुखी मंदिर का इतिहास बेहद पुराना है। मंदिर व देवी की महिमा को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। आदिवासी मां की महिमा का गुणगान अपने तरीके से करते हैं। मंदिर के प्राधिकृत पुजारी हेमंत मिश्र बताते हैं कि मां की कहानी राजा दक्ष के यज्ञ से शुरू होती है। यज्ञ स्थल पर शिव भगवान का स्थान नहीं दिखने पर मां सती ने अपमानित महसूस किया और और यज्ञ का विध्वंस कर तांडव करने लगी। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को सैकड़ों टुकड़ों में विभाजित कर दिया। दावा किया जाता है कि इस स्थान पर सती के जीभ का अग्र भाग गिरा। यहीं से आस्था का केंद्र बन गया। शारदीय व चैत्र नवरात्र में यहां मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड व बिहार के भक्तों का तांता लगा रहता है।
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