नगरवासियों को इस साल भी बारिश के दिनों में जलभराव से राहत नहीं मिल पाएगी। जलनिकासी के लिए बन रहा नाला अब भी अधूरा है। उन इलाकों में ही नाले का काम नहीं हो पाया है, जहां जलभराव की समस्या सबसे ज्यादा है।
कार्यदायी संस्था के अफसरों के मुताबिक छह महीने से बजट भुगतान न होने से कार्य प्रभावित है। अगर शीघ्र बजट मिलता है, तब भी नाला का काम पूरा होने में कम से कम छह महीने लगेंगे।
राॅबर्ट्सगज नगर पालिका क्षेत्र के लोगों को जल निकासी की समस्या से निजात दिलाने के लिए करीब 37 करोड़ की लागत से नाले का निर्माण कराया जा रहा है। राॅबर्ट्सगंज नगर से नाला का निमार्ण सरोई नदी लसड़ा तक बनना है।
करीब 18 किमी लंबे नाले के निर्माण को वर्ष 2021 में मंजूरी मिली थी। इसके लिए 37 करोड़ धनराशि स्वीकृत है। सीएंडडीएस को कार्यदाई संस्था नामित करते हुए यह कार्य नौ महीने में वर्ष 2022 की बरसात से पहले ही पूरा कर लिया जाना था।
तकनीकी दिक्कतों से टेंडर प्रक्रिया में देरी के चलते काम देरी से शुरू हुआ तो ढाई साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। कार्य की धीमी गति का हाल यह है कि 18 में से सिर्फ 12 किमी ही नाला बन पाया है।
इसमें भी रॉबर्ट्सगंज मेन बाजार धर्मशाला चौक से शीतला मंदिर चौक, चंडी तिराहा, सिविल लाइन जैसे इलाके में ही काम अधूरा है। इसके अलावा कचहरी तिराहा से पूरब महाल मार्ग पर भी नाला नहीं बन पाया है।
यह वह क्षेत्र हैं, जहां मुख्य बाजार होने के साथ ही जलभराव की समस्या सबसे ज्यादा है। जहां नाला बना भी है, वहां पुरानी नालियों को उसमें जोड़ा नहीं गया है। इसके चलते बरसात होने पर प्रभावित इलाकों में पाली लगना तय है।
घरों में घुस जाता है बारिश का पानी
राॅबर्ट्सगंज नगर पालिका क्षेत्र में जल निकासी बड़ी समस्या है। इसके लिए यहां लाखों रुपये पहले भी खर्च हो चुके हैं, लेकिन जल निकासी का कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं हो सका है। बारिश के मौसम में नगर की कई बस्तियों में लोगों के घरों और सड़क पर भी पानी जमा हो जाता है। इससे लोगों को पैदल आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ती है। घरों में पानी घुसने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो जाता है, इससे निजात दिलाने के लिए नाला का निर्माण कराया जा रहा है।
नाला निर्माण का कार्य प्रगति पर है। इन दिनों सिविल लाइन रोड पर काम चल रहा है। अभी सवा 12 किमी तक नाला बन चुका है। अभी 19 करोड़ रुपये ही मिले हैं। पिछले छह माह से बजट न मिलने से कार्य की गति जरूर प्रभावित हुई है। कोशिश है कि शीघ्र कार्य पूरा कर लिए जाए। इसके लिए बजट की मांग की गई है।
-भास्कर मौर्य, अवर अभियंता सीएंडडीएस।