जिले में शनिवार को बंदी सुधाकर दुबे की हुई मौत के मामले की जांच करने के लिए मिर्जापुर कमिश्नर पहुंचे । कमिश्नर के साथ मिर्जापुर डीएम भी मौजूद रही शासन स्तर से कमीशन की अगुवाई में बनी टीम में मिर्जापुर डीएम और सोनभद्र एसपी भी शामिल हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में टीम ने बंदी के मौत मामले में एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य से पूछताछ की।
बता दें कि राबर्ट्सगंज तहसील के हवालात में बकाएदार सुधाकर दुबे की मौत के मामले की जांच के लिए मिर्जापुर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम को 15 दिनों में जांच आख्या शासन को प्रेषित करनी है। टीम में मिर्जापुर डीएम और सोनभद्र एसपी भी सदस्य के रूप में शामिल है। शुक्रवार की शाम ही मिर्जापुर मंडलायुक्त सोनभद्र प्रकरण की जांच करने के लिए पहुंचे थे। शनिवार को कलेक्ट्रेट के सभागार में मंडलायुक्त डॉ. मुथुल कुमार स्वामी बी की अध्यक्षता में टीम ने यूबीआई से लिए गए 10.21 लाख रुपये बकाया की रिकवरी के लिए जारी आरसी के सापेक्ष सदर तहसील के संग्रह अमीन, तहसीलदार द्वारा इलेक्ट्रानिक्स दुकान के संचालक सुधार प्रसाद दुबे को राजस्व बंदी गृह में रखने मामले की जांच पड़ताल शुरू की। टीम में मिर्जापुर डीएम दिव्या मित्तल और जिले के एसपी डॉ. यशवीर सिंह भी मौजूद रहे।
टीम ने हवालात में रखे जाने के दौरान 19 मई को तबीयत बिगड़ने से सुधाकर दुबे की मौत कैसे हुई इस बारे में उस समय राबर्ट्सगंज तहसील में तैनात रहे एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य कर्मियों से जानकारी ली।। वहीं टीम के समक्ष किन्हींकारणवश मृतक के पुत्र नीरज व उनके परिजन बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे। जबकि मृतक के बेटे नीरज ने ही जिम्मेदारों की लापरवाही से मौत का आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया था। डीएम ने प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच कराई। जांच से संतुष्ट न होने पर पीड़ित ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेेश पर शासन ने जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित की है।