पहाड़ियों में स्थित घुमावदार मोड़ों पर गिराई गई राख को ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। हवा के साथ उड़ती राख अलग परेशानी पैदा कर रही है। बताते चलें कि विभिन्न परियोजनाओं से निस्तारित राख को बल्कर के जरिए अनपरा-रेणुकूट मार्ग से गंतव्य के लिए ले जाया जाता है, लेकिन इन्हीं बल्करों से जगह-जगह राख गिराए जाने के सिलसिले ने आवागमन करने वालों में खलबली मचा दी है।
30 किमी दूरी वाले रास्ते में करहिया, बैरपान, मढ़ैया, गाढ़ा बैरियर, जलेबी मोड़, रिहंद डैम, सीआईएसएफ गेट, वन देवी मंदिर, तुर्रा चढ़ाई आदि जगहों पर सड़क की पटरी पर राख गिरा दी गई है। इससे तेज हवा के झोकों और वाहनों के पहिए से उड़ने वाली राख जहां आवागमन में दिक्कत कर रही हैं।
वहीं जरा भी चूक होने पर वाहनों को कई फीट गहरी खाईं में गिरने का डर भी सताने लगा है। हालांकि कई बार बड़ी दुर्घटना होते-होते बची है। लेकिन फिर भ्ाी परियोजनाओं के प्रबंध तंत्र इसे अनजान बने हैं। जब की आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खास तौर से दो पहिया वाहन चालकों को इससे परेशानी हो रही है।
उधर, सीओ सितांशु यादव कहते हैं कि मामला संज्ञान में है। इसको लेकर जल्द ही ट्रांसपोर्टरों की बैठक ली जाएगी। किसी भी हाल में सड़क किनारे राख नहीं गिराने दी जाएगी। कहा परियोजना प्रबंधकों को भी अवगत कराया जाएगा ताकि वह इसके प्रति गंभीर हों।