चतरा ब्लॉक स्थित नल राजा मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। सदर विधायक भूपेश चौबे के प्रस्ताव पर पर्यटन विभाग ने इसे वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना में शामिल किया है।
इसके तहत यहां पर्यटकों के लिए शेड, शौचालय, बेंच सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मंदिर का सुंदरीकरण भी होगा। पर्यटन विभाग इसकी रुपरेखा बनाने में जुट गया है।
नल राजा मंदिर केतार गांव में कर्मनाशा नदी के किनारे स्थित है। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग की ऊंचाई प्रतिवर्ष बढ़ती है। मंदिर की यह भी खासियत है कि अहंकार के वशीभूत होकर कोई व्यक्ति यहां स्थापित शिवलिंग को अपनी बांहों में लेना चाहेगा तो सफल नहीं हो पाएगा।
यहां हर वर्ष बसंत पंचमी पर भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों की भीड़ उमड़ती है। वर्ष 1995 में पुरातत्व विभाग की ओर से नलराजा मंदिर के आसपास खुदाई कराई गई, जिसमें 325 ईशा पूर्व के तमाम पीतल और मिट्टी का घड़ा, बर्तन, तलवार सहित अन्य सामान मिले थे।
खोदाई में मिले कुछ चीजें दिल्ली के संग्रहालय में भी रखी गई हैं। अब मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू हुई है।
सदर विधायक भूपेश चौबे ने पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को इसका प्रस्ताव प्रेषित किया था। इसे मंजूरी देते हुए पर्यटन विभाग ने वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना में मंदिर के सुंदरीकरण व विकास को शामिल करने का निर्णय लिया है। मंदिर के विकास से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।