राबर्ट्सगंज में धूप से बचाव के लिए छाता लगाकर जाती यु
अप्रैल माह की शुरुआत से ही आग उगलती सूरज लगातार प्रचंड होता जा रहा है। सोमवार को पारा 42.6 डिग्री के रिकार्ड स्तर तक जा पहुंचा। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 3.6 डिग्री अधिक है। गर्म पछुआ हवा के थपेड़े पूरे दिन बदन झुलसाते रहे। न घर के बाहर चैन मिल रहा था और न ही घर के भीतर।
दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। जिला मुख्यालय राबट्र्सगंज सहित अन्य कस्बों में भी तेज धूप के चलते भीड़भाड़ कम नजर आई। यह इस माह का अब तक का सर्वाधिक तापमान है।
सूर्योदय के साथ ही आसमान से आग बरसने की शुरुआत हो गई। धूप की तल्खी सुबह दस बजे तक ऐसी हो गई थी कि बदन पर आंच लग रही थी। दोपहर में जलन सी होने लगी। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया था। केवल कामकाजी लोग ही घरों से बाहर निकले।
राहगीरों के लिए आधे घंटे भी चलना दूभर हो गया था। प्यास से लोग परेशान दिखे। स्कूल से घर लौटते समय छोटे बच्चों के चेहरे मुरझाए रहे। हालत यह थी कि दोपहर में सफर पर निकले अधिकांश लोग सिरदर्द, बदन दर्द, मिचली, सन बर्न की चपेट में आकर तमाम लोग चिकित्सकों के यहां पहुंचे। पंखे की हवा भी लू का एहसास कराती रही।
दोपहर में कूलर भी बेमतलब साबित होते रहे। हर कोई तपिश और उमस के आगे परेशान रहा। न्यूनतम पारा 28 डिग्री के इर्द-गिर्द बने रहने से रात भी लोगों को बेचैनी भरे हालत में गुजारनी पड़ी।