सोनभद्र। कागजी दांव-पेंच में फंसे कई स्कूलों में इस बार भी इंटर के छात्र-छात्राओं को बिना प्रयोग के ही कई विषयों की पढ़ना होगा। इसकी प्रमुख वजह जिले में आठ प्रैक्टिकल लैब के निर्माण की प्रक्रिया अवरूद्ध होना है।
जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन 47 राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज संचालित हैं। इन कॉलेजों में शिक्षा के आधुनिकीकरण पर जोर देने व कई नई पहल के दावे भी होते रहे हैं। एक ओर कई ऐसे स्कूल हैं, जहां प्रायोगिक विषयों के शिक्षकों की कमी है। तो कहीं प्रयोगशाला ही नहीं जबकि प्रयोगात्मक परीक्षा से पूर्व बच्चों को जरूरी शिक्षा नहीं मिल पाती है। ऐसे में राजकीय इंटर कॉलेज घोरावल और राजकीय इंटर कॉलेज चपकी में रसायन, भौतिक, जीव विज्ञान की एक-एक लैब (कुल छह) और राजकीय इंटर कॉलेज कोन में जीव विज्ञान और भौतिक की लैब के निर्माण की पहल साल भर काफी पहले शुरू की गई थी। समग्र शिक्षा माध्यमिक कार्यक्रम के तहत शासन स्तर से तीन कालेजों में कुल आठ लैंब निर्माण के लिए बजट जारी किया था। जिसमें प्रत्येक लैब के निर्माण में 13 लाख 50 हजार की दर से 1.08 करोड़ और प्रत्येक लैेब में जरूरी उपकरणों की खरीद के लिए एक-एक लाख की दर से कुल आठ लाख रुपये मिले थे। ऐसे में बच्चों को उम्मीद थी कि अब प्रायोगिक विषयों की पढ़ाई बेहतर हो सकेगी, मगर इन उम्मीदों को झटका लगा है। कई निर्माण संबंधी संस्थाओं और कंपनियों ने कम बजट का हवाला देते हुए निर्माण कराने से हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में अब नये सत्र में भी इन स्कूलों के बच्चों को बिना लैब के ही प्रायोगिक विषयों की पढ़ाई करनी होगी। कई कॉलेज ऐसे भी हैं, जहां लैब क्रियाशील नहीं हैं।
मांग पत्र पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं
जिले में कुछ माह पूर्व कई निर्माण कंपनियों और सरकारी विभागों की एक संयुक्त बैठक भी हुई। मगर सभी ने जब कम बजट का हवाला देते हुए कार्य से इन्कार कर दिया तो शासन को निर्माण बजट की धनराशि में इजाफा करने के लिए पत्राचार किया गया था। विभागीय जानकारों की मानें से तय धनराशि में दोगुना इजाफे की मांग की गई है। वहीं लैब नहीं होने से हजारों छात्र प्रैक्टिकल की सुविधा से वंचित रहेंगे।
लैब के निर्माण में आ रही दिक्कतों से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। बजट को बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। आगे जो भी निर्देश होंगे उसे प्राथमिकता पर अमल में लाया जाएगा। - राजेंद्र यादव, डीआईओएस।