कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिले के स्कूलों को बंद कर दिया गया है। इसके अलावा आगामी चुनाव के तहत कई विभागीय अधिकारियों और स्कूली शिक्षकों की ड्यूटी उसमें भी लगाई गई है। इन कार्यों से शिक्षकों की परेशानी बढ़ी है। शिक्षकों को दोहरी जिम्मेदारी मिलने से ऑनलाइन पढ़ाई में कई बाधाएं आने वाली हैं।
परिषदीय विद्यालयों में सरकार ने पहले 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश किया था। इस बीच कोरोना के केस बढ़ने के चलते 23 जनवरी तक स्कूलों को बंद कर दिया गया है। हालांकि शिक्षकों को नियमित स्कूल आने और बच्चों की ऑनलाइन क्लास लेने की हिदायत दी गई है। नेटवर्क की कमी से जूझते जिले के कई क्षेत्रों में ऑनलाइन पढ़ाई तो पहले से भी चुनौतीपूर्ण रही है मगर अब नई चुनौती चुनावी ड्यूटी की है। शिक्षकों की बड़ी संख्या में ड्यूटी चुनाव कार्य के लिए लगाई गई है। किसी को पीठासीन अधिकारी का दायित्व दिया जाना है तो किसी को प्रथम मतदान अधिकारी बनाया जाना है। इसके लिए उनकी सूची तैयार हो चुकी है। ड्यूटी लगाने की कवायद जारी है। शीघ्र ही उनका प्रशिक्षण भी शुरू हो जाएगा। इतना ही नहीं कई जगहों पर तो कोविड टीकाकरण की खराब प्रगति के कारण शिक्षकों को लोगों को जागरूक करने में लगा दिया गया है। उन्हें जिम्मेदारी दी गई है कि गांवों में जाकर लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। दोहरी जिम्मेदारी के मारे शिक्षक पढ़ाई के मूल काम में रुचि नहीं ले पा रहे और न ही राष्ट्रीय महत्व वाले इन कार्यक्रमों में ड्यूटी लगाने का विरोध कर पा रहे हैं। ऐसे में उनका तनाव बढ़ता जा रहा है। बीएसए हरिवंश कुमार का कहना है कि जिले में चुनाव अंतिम चरण में है। लिहाजा अभी शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगी है। वह पठन-पाठन का कार्य ऑनलाइन माध्यम से सुचारु रूप से करते रहें। आगे की स्थिति के आधार पर उन्हें निर्देशित किया जाएगा।