वन रेंज के सिलहट जंगल में शनिवार की सुबह आग लगने से कई बिगहा क्षेत्र में लगे पेड़-पौधे जल गए। इससे वन संपदा को भारी क्षति हुई है।
अगलगी के लिए महुआ बिनने के लिए झाड़-झंखाड़ की सफाई के लिए लगाई गई आग को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्रतिवर्ष महुआ के सीजन में आग लगती है, बावजूद इसके अगलगी की घटना को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से समुचित प्रबंध नहीं किए जा सके हैं।
बताया जाता है कि रामगढ़ रेंज के सिलहट जंगल में करीब दस साल पूर्व प्लांटेशन में पौधरोपण किया गया था। पनिकप कला गांव के पूर्व स्थित जंगल में जहां पर प्लांटेशन कराया गया था शनिवार की सुबह आठ बजे हुई अगलगी की घटना के बाद ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई।
ग्रामीणों ने इसकी सूचना रेंजर ओम प्रकाश मिश्रा को दी। सूचना के करीब तीन घंटे बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तब तक आग कई बिगहा क्षेत्रफल में फैल चुकी थी।
वन कर्मियों की ओर से आग को बुझाने का प्रयास किया जा रहा था। उधर, सूत्रों की मानें तो अगलगी की घटना को अंजाम महुआ बिनने वालों ने दिया है, क्योंकि महुआ के पेड़ के नीचे सूखे पत्तों के जमा होने से महुआ बिनने में परेशानी होती है।
रेंजर ओम प्रकाश मिश्रा के मुताबिक अगलगी की घटना की सूचना मिलते ही वनकर्मी आग को बुझाने में जुट गए। फिलहाल अगलगी की घटना की जांच कराई जाएगी।