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दस अस्पतालों पर लटकी तलवार, निरस्त हो सकता है पंजीकरण

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उपचार में लापरवाही से कई मौतों व डीएम की सख्ती के बाद स्वास्थ्य महकमे ने नियमों को ताख पर रख कर अस्पताल संचालित करने वालों पर शिकंजा कस दिया है। जिले के दस चर्चित अस्पतालों पर पंजीकरण निरस्त होने का खतरा मंडराने लगा है। विभाग की ओर से संबंधितों को इस बाबत नोटिस जारी किया गया है।
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जिले में नियमों को ताख पर रख कर बड़ी तादाद में अस्पतालों का संचालन हो रहा है। कई स्थानों पर बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के ऑपरेशन हो रहे हैं। सीएमओ कार्यालय में जिन चिकित्सकों व कर्मचारियों के नाम दर्ज कराकर पंजीकरण लिया गया है, उनका भी अस्पताल में कहीं पता नहीं है। अस्पतालों के बोर्ड पर नाम अंकित कराने वाले डॉक्टर वहां आते ही नहीं और न ही आईसीयू संचालित करने वाले अस्पतालों में एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ हैं।
डीएम के निर्देश के बाद पिछले दिनों हुई जांच में इसकी पोल खुली है। कई अस्पतालों पर ताला भी लगाया जा चुका है तो कुछ से स्पष्टीकरण मांगा गया था। पर्याप्त समय बीतने के बाद भी करीब दस अस्पतालों के संचालकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। निजी अस्पताल पंजीकरण अधिकारी डॉ. गुरू प्रसाद ने बृहस्पतिवार को दस अस्पतालों को अंतिम नोटिस जारी किया। उनसे दो दिनों के अंदर साक्ष्य सहित जवाब मांगा गया है।
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ऐसे में इन अस्पतालों के संचालकों के पास जवाब देने का शनिवार तक मौका है। इन पर पंजीकरण निरस्त होने की तलवार लटक रही है। इसके साथ ही अब अभियान में ऐसे लोगों की मुश्किलें भी बढ़ने की उम्मीद है, जहां डॉक्टर के स्थान पर हाईस्कूल व इंटर पास युवक सिर्फ अनुभव लेकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
शासन के निर्देश पर जिले में मानक के विपरीत संचालित अस्पतालों की जांच की जा रही है। पिछले दिनों निरीक्षण के दौरान कई अस्पतालों में मानकों में घोर अनियमितता मिली थी। इस पर उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा गया था। कई दिन बाद भी कुछ अस्पताल संचालकों ने जवाब नहीं दिया है। ऐसे में उन्हें अंतिम नोटिस दिया गया है। अगर साक्ष्य सहित जवाब नहीं दिया जाता तो पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई होगी। - डॉ. गुरू प्रसाद, नोडल अधिकारी।
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