राबर्ट्सगंज में नोट बंदी की समस्या से परेशान परिवार शादी का कार्ड दिखाते।
नोटबंदी के 68वें दिन बाद भी बैंकों में नोटबंदी की समस्या बरकरार हैै। सप्ताह भर में महज 24 हजार रुपये निकलने से सबसे अधिक वे लोग परेशान हंै जिनके बेटे-बेटी की शादी है। खुद के खाते में रुपये होने के बावजूद लोग कर्ज लेकर काम चलाने के लिए मजबूूर हंै।
ऐसे हालत से राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के लोढ़ी गांव की रहने वाली मंजू देवी गुजर रही है। मंजू ने बताया कि बीमारी से उनके पति बनारसी साहू की 24 जुलाई 2015 को मौत हो गई थी। उनका बेटा अभिषेक एवन ट्राली कृषि यंत्र की दूकान संचालित कर घर का खर्च चलाता है। उन्होंने बताया कि वह अपनी बड़ी बेटी पूजा की शादी 23 जनवरी को मिर्जापुर के मुकेरी बाजार निवासी रोहित के साथ कर रही है। छोटी बेटी खुशी इंटर की पढ़ाई कर रही है।
21 जनवरी को लोढ़ी स्थित मकान से लेडिज संगीत है। वैवाहिक कार्यक्रम मिलन मिर्जापुर से संपन्न होगा। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद बैंक में उनका खाता है, लेकिन बैंक से सप्ताह में महज 24 हजार रुपये निकल रहा है। खाते में रुपया होने के बाद भी जररूत के अनुसार धन नहीं निकाल पा रही हूं। जबकि शादी को सिर्फ पांच दिन बचे है। नोटबंदी ने कर्ज लेने को मजबूर कर दिया है। कहा कि रिश्तेदारों और परिचितों से कर्ज लेकर किसी तरह से काम चला रही हूं।
इस संबंध में लीड बैंक के मैनेजर करुणेश कुलश्रेष्ठ ने कहा कि आरबीआई के निर्देशानुसार जिले मेें स्थित करीब 154 बैंकों से बचत खाते से उपभोक्ताओं को सप्ताह में 24 हजार रुपये दिया जा रहा है। फिलहाल शादी विवाह जिनके घरों में है उन्हें भी 24 हजार रुपये देने का आदेश है। उन्होंने कहा कि जिले में लगभग 45 एटीएम हैं, कई चालू नहीं है।