ऊर्जांचल में दिवाली के समय लगने वाली आतिशबाजी की दूकानों से चायनीज पटाखे इस बार गायब हैं। पिछले वर्ष पटाखों-फुलझड़ियों में चाइनीज की तीस फीसदी की हिस्सेदारी थी, लेकिन इस बार व्यापारियों और लोगों के बहिष्कार ने चायनीज पटाखे को मार्केट से गायब कर दिया। व्यापारियों का साफ शब्दों का कहना था कि देश पहले, मुनाफा बाद में।
अनपरा बाजार में ईश्वर चंद्र जैन, सुनील यादव, रविंद्र गुप्ता, संतोष गुप्ता, सतपाल जैन, राजेश, गोकुल सहित 33 दूकानदार पिछले कई वर्ष से पटाखे की दूकान लगा रहा है। इन दुकानों से ही ऊर्जांचल के 90 फीसदी स्थानों पर आतिशबाजी सामग्रियों की पूर्ति होती है। पिछले साल यहां के आतिशबाजी बाजार पर 35 से 40 फीसदी चायनीज पटाखे बेचने के लिए रखे गए थे, लेकिन अबकी साल खोजने से भी चायनीज पटाखे, फुलझड़ियां नहीं मिलीं। कई व्यापारियों ने व्यापारियों ने आरोप लगाया कि पिछले साल जहां वह लोग महज 150 रुपये का ट्रेजरी शुल्क जमा किए थे, लेकिन इस वर्ष ट्रेजरी शुल्क के रूप में दो हजार जमा कराए गए। जबकि सुरक्षा प्रबंध के नाम अग्निशमन वाहन तो दूर, किसी कर्मी ने दर्शन देने की जरूरत नहीं समझा। अलबत्ता पुलिसकर्मियों पर उगाही का भी आरोप लगाया। बता दें कि अनपरा ऊर्जांचल का प्रमुख कारोबारी बाजार है। इस कारण यहां लिए जाने वाले निर्णय का असर पूरे ऊर्जांचल में दिखाई देता है।