2017 के विधानसभा चुनाव में बागियों ने अपनों के लिए चुनौती खड़ी करना शुरू कर दी है। खासकर सपा और कांग्रेस से टिकट से वंचित अब निर्दल ही मैदान में ताल ठोकने लगे हैं। सोशल मीडिया पर अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही वे मैदान में उतर आए हैं। इससे दोनों दलों की नैया मझधार में डगमगाने लगी है।
विधानसभा चुनाव की बयार तेज हो गई है। आरक्षण को लेकर विवाद में आई दो सीटों को छोड़कर दो अन्य सीटों राबर्ट्सगंज और ओबरा में प्रत्याशियों की घोषणा राजनीतिक दलों ने कर दी है। इसी के साथ ही कुछ दलों में बगावत के सुर भी सामने आने लगे हैं। पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में रहा समाजवादी पार्टी का विवाद फिलहाल थमता नहीं नजर आ रहा है। महज दो माह पूर्व तक सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव ने घोरावल विधानसभा सीट से जय प्रकाश पांडेय को प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन बाद में अखिलेश यादव की ओर से विधायक रमेश चंद्र दूबे प्रत्याशी घोषित हुए और जय प्रकाश का पत्ता कट गया। रमेश अब कांग्रेस, सपा गठबंधन के प्रत्याशी हैं। उधर राबर्ट्सगंज विधानसभा सीट भी सपा के खाते में गई है और यहां से विधायक अविनाश कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया गया है। ऐसे में कांग्रेस को एक भी सीट न मिलने से कांग्रेसियों के सुुर बदलने लगे हैं। उधर पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश देव पांडेय ने बागी रूख अपनाते हुए निर्दल ही चुनाव मैदान में राबर्ट्सगंज सीट से ताल ठोकने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि उन्होंने पहले से ही चुनाव की तैयारी की है। टिकट मिले, न मिले कोई फर्क नहीं पड़ता।