सोनभद्र। वर्ष 2016 में ओबरा के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में हुए एक खनन पट्टे के मामले में गड़बड़ी पाए जाने पर ओबरा एसडीएम ने दो लेखपालों को निलंबित कर दिया है। निलंबन की पुष्टि अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने की। शासन स्तर पर चल रही जांच में इन दोनों लेखपालों की भूमिका संदिग्ध होने पर दोनों के खिलाफ जिलाधिकारी के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में 10 वर्ष के लिए एक खनन पट्टा किया गया था। तब लेखपाल राजेश मिश्रा थे। उनके हटने के बाद वहां लेखपाल राजकुमार मिश्रा को तैनात किया गया था। इस दौरान खनन पट्टे के सीमांकन और जमीन संबंधी रिपोर्ट लगाने में दोनों लेखपालों की भूमिका संदिग्ध थी। इस मामले में शिकायत होने पर शासन स्तर से पिछले लंबे समय से जांच चल रही थी। जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध मिली। इस पर जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम ओबरा चंद्र प्रकाश ने दोनों लेखपालों राजेश मिश्रा और राजकुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही दोनों को ओबरा तहसील से संबद्ध कर दिया है। बताया जा रहा है कि इसमें से राजेश मिश्रा एक ऐसे लेखपाल रहे जो सबसे ज्यादा समय तक ओबरा क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में तैनात रहे। वर्तमान में दोनों लेखपाल किसी अन्य क्षेत्र में तैनात थे। सूत्र बताते हैं कि एक व्यापारी को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने पट्टा स्थल को लेकर गड़बड़ी की थी। प्रशासन की इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि वर्ष 2016 में हुए पट्टे के मामले में जांच हुई थी। कार्रवाई वर्ष 2017 में की जानी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं हो सकी थी। उसी मामले में दोनों लेखपालों को निलंबित किया गया है।