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गुटबंदी चोपन, रेणुकूट उपचुनाव में झारखंड की करा सकती है पुनरावृत्ति

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सोनभद्र। भाजपा नेताओं के बीच चल रही गुटबंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। यह स्थिति तब है जबकि जिले से सटे झारखंड राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। उधर, जिले के रेणुकूट और चोपन नगर पंचायत के चेयरमैन पद के लिए हो रहे उपचुनाव में भी पार्टी नेताओं के बीच चल रही गुटबंदी का असर दिखने लगा है। एक गुट जहां उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के प्रचार में सक्रियता से जुटने की बजाय उदासीन रवैया अपनाए हुए है, वहीं दूसरे गुट के नेता भी गुटबंदी से उबर नहीं पा रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि गुटबंदी के चलते ही चेयरमैन पद के लिए हो रहे इस उपचुनाव में प्रत्याशी के नाम की घोषणा समय से नहीं हो सकी। भाजपा नेतृत्व की तरफ से नामांकन के अंतिम दिन 26 दिसंबर से एक दिन पहले 25 दिसंबर को देर शाम पार्टी प्रत्याशी के नाम की घोषणा की गई। बताया जा रहा है कि उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा में भाजपा के एक गुट के लोगों की ही चली है, इसीलिए दूसरे गुट में शामिल नेता नाराज हैं और चुनाव के प्रति उदासीन बने हुए हैं।
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ज्ञात हो, रेणुकूट नगर पंचायत के चेयरमैन रहे शिव प्रताप सिंह की कुछ महीने पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा चोपन नगर पंचायत के चेयरमैन रहे इम्तियाज अहमद की भी 2018 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इन दोनों जगहों पर चेयरमैन के रिक्त पद के लिए हो रहे उपचुनाव में 14 जनवरी को मतदान होना है। इस उपचुनाव में रेणुकूट में भाजपा ने शारदा खरवार को मैदान में उतारा है जबकि शिवप्रताप की पत्नी निशा सिंह चुनाव में निर्दल प्रत्याशी के रूप में भाग्य आजमा रही हैं। उन्हें सपा व कांग्रेस के अलावा भाकपा का भी समर्थन है। यहां अनिल कुमार सिंह (पूर्व चेयरमैन) व राजपति साहनी भी निर्दल प्रत्याशी के रूप में भाग्य आजमा रहे हैं। रेणुकूट में निशा को सपा व कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है, वहीं भाजपा प्रत्याशी को पार्टी नेताओं के बीच चल रही गुटबंदी के चलते अपने दम पर मजबूत दावेदारी के लिए जीतोड़ कोशिश करनी पड़ रही है।
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