सोनभद्र। मकर संक्रांति नजदीक आने के साथ ही जिले के बाजारों में जगह-जगह पतंग की दुकानें सजने लगी है। दुकानों पर चीन की बनी पतंगें और मांझे की भी बिक्री हो रही है। पतंग उड़ाते समय सतर्कता नहीं बरतने पर दिखने में आकर्षक और मजबूत मंझे बुरी तरह से घायल कर सकता है। दरअसल, अपनी पतंग को कटने से बचाने के लिए लोग चाइनीज मंझे का प्रयोग करते हैं। लेकिन यह डोर सिर्फ आकाश में उड़ते पंछियों को ही घायल नहीं करती, बल्कि जरा सा टकराव होने पर नाजुक हाथों को भी घायल कर देती है। बावजूद इसके बाजारों में बिक रहे चाइनीज मंाझे पर प्रशासन रोक नहीं लगा पा रहा है।
जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज नगर सहित जिले के अन्य स्थानों पर लगभग 80 स्थानों पर पतंग की दुकानें सज चुकी है। राबर्ट्सगंज नगर में लगभग 20 स्थानों पर पतंग की दुकानें सजीं हैं। जिले में पतंग के कारोबार से लगभग 150 से 200 लोग जुड़े हैं। पतंग के बड़े दुकानदार डेढ़ से दो लाख का कारोबार मकर संक्रांति पर कर लेते है। जबकि छोटे दुकानदारों का 50 हजार तक कारोबार हो जाता है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में हर साल लगभग 25 लाख का कारोबार पतंग, मंझे और परेता (लटाई) की बिक्री से होता है। पतंग कारोबारियों के मुताबिक वह औरंगाबाद, लखनऊ, रायबरेली और वाराणसी से पतंग मंगाते हैं। लेकिन इसके आड़ में चाइनीज पतंग और मंझे की भी खूब बिक्री हो रही है। मजबूत और टिकाऊ होने से बच्चों की पसंद भी चाइनीज मंझे बना हुआ है। लेकिन इसके बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।