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Sonebhadra News: सोनभद्र में हर दिन मिल रहे टीबी के 12 मरीज, प्रति माह तीन मरीजों की जा रही जान

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सोनभद्र। औद्योगिक परिक्षेत्र वाले जिले में क्षय रोग से जुड़े आंकड़े डराने वाले हैं। हर दिन जहां टीबी के 12 नए मरीज पाए जा रहे हैं। वहीं प्रति माह तीन रोगियों की जान चली जा रही है। एचआईवी संक्रमितों में टीबी का प्रकोप जानलेवा साबित हो रहा है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के संक्रमण की दर तिगुनी है। ऐसे मरीजों (एमडीआर) की भी संख्या बढ़ रही है, जिन पर टीबी की अधिकांश दवाएं बेअसर साबित होने लगी हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में टीबी (क्षय रोग) के कुल 4542 मरीज पाए गए हैं। इसमें 44 मरीज डीआर टीबी (ड्रग रेजिस्टेंट टीबी) के मिले हैं। इसमें फेफड़ों में हुई टीबी के मरीज 4049, अन्य अंगों के 460 और एचआईवी संक्रमण वाले टीबी मरीज 33 हैं। इस अवधि में 40 की मौत हुई है। नए साल में भी लगातार नए मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है। महज 89 दिन (पहली जनवरी से 20 मार्च 2026) में 868 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई है। 13 मरीज ड्रग रेजिस्टेंट (डीआर) टीबी के पाए गए हैं। सभी का इलाज सरकार की तरफ से तय गाइडलाइन और निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। इन आंकड़ों में एक बड़ी बात यह सामने आई है कि टीबी संक्रमण के मामले में महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सेहतमंद साबित हुई हैं। अब तक जो आंकड़े आए हैं, उसके मुताबिक पुरुषों में संक्रमण की दर महिलाओं के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस (विश्व क्षय रोग दिवस) मनाया जाता है। इसके लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच और उपचार को प्रोत्साहित करने के साथ ही दुष्प्रभावों को कम करने की कोशिश की जाती है।
बीमारी के लक्षण :
यह रोग संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने पर निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए फैलता है। दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, खांसी में खून, भूख में कमी या भूख न लगना, लगातार या शाम के समय बुखार आना, सीने में दर्द, वजन में तेजी से गिरावट, गले (लिम्फ नोड्स) में सूजन इस रोग के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।
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ऐसे करें बचाव:
खांसते या छींकते समय मुंह-नाक को ढंक कर रखें। दो सप्ताह से अधिक खांसी होने तो तत्काल चेकअप कराया। किसी भी हाल में दवा बीच में न छोड़ें और निक्षय योजना के तहत दिए गए निर्देशों का पालन करें। पौष्टिक आहार लेते रहें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। बच्चों को इससे बचाव के लिए बीसीजी का टीका लगवाएं। अगर कोई व्यक्ति टीबी मरीजों के संपर्क में रह रहा है तो उसकी समय-समय पर जांच कराते रहें। झाड़-फूंक या किसी अफवाह पर ध्यान न दें। टीबी का कोई भी लक्षण दिखे तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं।
सोनभद्र एक औद्योगिक जिला है। इस कारण यहां सिलिको-ट्यूबरकुलोसिस एवं अन्य श्वसन संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या अन्य जिलों के मुकाबले अधिक है। मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद जिले और सीमावर्ती राज्यों के मरीजों को टीबी व श्वसन रोगों के बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध हुई है। इस रोग का पूर्ण उपचार संभव है। -डॉ. नागेंद्र कुमार, चेस्ट स्पेशलिस्ट, मेडिकल कॉलेज।
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टीबी की समय पर पहचान और इलाज से बड़े ही आसानी से इससे मुक्ति पाई जा सकती है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि सामाजिक संगठन भी पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए आगे आएं ताकि जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सके। - डॉ. राहुल सिंह, सहायक आचार्य (जनरल मेडिसिन), मेडिकल कॉलेज।
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जिले के सभी टीबी के मरीजों का इलाज, जांच-फॉलो-अप निर्धारित गाइडलाइंस के अनुसार निःशुल्क किया जा रहा है। इसका इलाज शत-प्रतिशत संभव है। टीबी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह के अनुसार पूरा उपचार करें। - डॉ. जगदीश पटेल, चेस्ट स्पेशलिस्ट, जिला क्षय रोग केंद्र।
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