सोनभद्र। जिले में कुपोषण से मुक्ति के लाख दावे किये जा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि शून्य से पांच वर्ष तक का हर चौथा बच्चा कुपोषित है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के सितंबर माह में हुए सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। सर्वे में पांच वर्ष तक के 206573 बच्चों में से 35734 बच्चे कुपोषित और 5684 बच्चे अति कुपोषित हैं। अति कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र खुला है लेकिन वहां भी करीब एक माह से बच्चे भर्ती नहीं किये जा रहे हैं।
बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश की सीमा से सटे सोनभद्र में तमाम औद्योगिक कल कारखाने और खनन उद्योग हैं, लेकिन यहां के लोगों को उम्मीद के अनुुसार रोजगार नहीं मिल पा रहा है। जल और वायु प्रदूषण ने यहां की आबोहवा को प्रदूषित कर दिया है। जिसका शिकार आम लोग हो रहे हैं। पोषक आहार न मिलने और प्रदूषण की मार झेलने से लोग कुपोषित हो रहे हैं। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को लेकर सितंबर माह में हुए सर्वे पर गौर करें तो मिलेगा कि जिले का हर चौथा बच्चा कुपोषित है। जिले के आठ ब्लॉकों और सभी नगरीय क्षेत्रों को मिलाकर शून्य से पांच वर्ष तक के कुल दो लाख छह हजार पांच सौ तिहत्तर बच्चे हैं। इसमें से 5684 बच्चे अति कुपोषित और 35734 बच्चे कुपोषित हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए अनुपूरक पोषाहार योजना, तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए हॉट कुक्ड योजना संचालित है। इसके अलावा बच्चों की काउंसिलिंग और टीकाकरण का कार्य भी होता है। उन्होंने बताया कि अति कुपोषित बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है।
सोनभद्र; जिला संयुक्त चिकित्सालय में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में पिछले 21 दिन से एक भी कुपोषित बच्चा भर्ती नहीं हुआ। दस बेड वाले इस केंद्र में कुपोषित बच्चों का उपचार कर उन्हें स्वस्थ्य किया जाता है। उनके साथ रहने वाली माता को भी यहां लाभान्वित किया जाता है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तैनात आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होती है कि वे कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराएं लेकिन 21 दिनों से सभी बेड खाली होने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग के कर्मी किस हद तक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं, जबकि जिले में साढ़े पांच हजार से अधिक अति कुपोषित बच्चे हैं।