रेणुकूट। सोमवार की रात हुई रेणुकूट नगर पंचायत के चेयरमैन शिव प्रताप सिंह की हत्या से आठ माह पूर्व 20 जनवरी को हुई घटना लोगों के जेहन में ताजा हो गई। 20 जनवरी की आधी रात वर्तमान व पूर्व चेयरमैन के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। जिसमें लाठी-डंडे, हाकी व चाकू भी चला था। मारपीट की घटना के बाद आसपास के थानों की फोर्स के साथ पीएसी भी पहुंची थी। मारपीट में गंभीर रूप से घायल चार लोगों को रेफर भी किया गया था। दोनों पक्षों की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया था।
इसी वर्ष 17 जनवरी को नगर पंचायत रेणुकूट में कंबल वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें भगदड़ मचने से 14 महिलाएं घायल हो गई थीं। जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई थी। भगदड़ मचने की घटना को लेकर पूर्व चेयरमैन अनिल सिंह और वर्तमान चेयरमैन शिव प्रताप सिंह के समर्थकों के बीच तनाव चल रहा था। शिव प्रताप के समर्थक आशीष सिंह ने पुलिस को तहरीर दी थी कि 17 जनवरी को कंबल वितरण के दौरान पूर्व चेयरमैन अनिल सिंह ने साजिश करके कार्यक्रम में भगदड़ मचवाया। इसके चलते कई महिलाएं घायल हो गईं। इसी मामले को लेकर 20 जनवरी की रात भी पूर्व चेयरमैन अनिल के भाई बृजेश सिंह से व्हाट्सएप पर बातचीत हो रही थी, तभी बृजेश ने व्हाट्सएप पर लिखकर जान से मारने की धमकी दी थी। इसी के 15 मिनट बाद वह अपने लोगों के साथ अनिल के पास पहुंच गए और जमकर मारपीट की। तहरीर पर पुलिस ने पूर्व चेयरमैन अनिल सिंह, बृजेश सिंह, राकेश सिंह, जमुना सिंह, शेरू व एक अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था।
उधर, दूसरे पक्ष से मुर्धवा निवासी संतोष सिंह ने पुलिस को तहरीर दी कि उनका भतीजा जमुना सिंह अपने मित्र रोहित सिंह के साथ रेणुकूट से मुर्धवा की ओर आ रहा था। रास्ते में बस स्टैंड के समीप बृजेश सिंह व मोबीन खान को देखकर बातचीत करने लगा। इसी दौरान वहां पर आए वर्तमान चेयरमैन के भाई विजय प्रताप सिंह, आशीष समेत अन्य लोगों ने हमला कर दिया। दूसरे पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने विजय प्रताप सिंह, आशीष सिंह, अमित कुमार सिंह, मिथिलेश, शाहरुख व एक अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। इसी घटना के बाद से दोनों पक्षों में जबरदस्त तनाव चल रहा था। मंगलवार को पुलिस को दी गई तहरीर में शिव प्रताप सिंह के भतीजे अवनीश सिंह ने उक्त घटना का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया है कि पूर्व थानाध्यक्ष मूलचंद चौरसिया ने विवेचना में आरोपियों पर से धारा 307 हटा दिया था, जिससे उनका हौसला बढ़ गया और आरोपियों ने इस जघन्य घटना को अंजाम दे दिया।