पर्यटन विभाग की ओर से प्राकृतिक जैव विविधताओं से भरपूर सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली के नौगढ़ परिक्षेत्र को इको टूरिज्म का हब बनाने की पहल तेज हो गई है।
यहां के पौराणिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुषमा से भरपूर स्थलों के संरक्षण के साथ ही रेणुकूट स्थित रेणुकेश्वर महादेव और चुनार-विजयगढ़ दुर्ग को पर्यटन की दृष्टि से संवारने की योजना बनाई गई है।
सोनभद्र के हाथीनाला में प्रदेश में सबसे अधिक जैव विविधता देख रेणुकूट वन परिक्षेत्र (अनपरा, शक्तिनगर शामिल) को पहली बार पर्यटन के नक्शे पर महत्वपूर्ण स्थान देने का निर्णय लिया गया है।
यह पहल मील की पत्थर साबित हो, इसके लिए एशिया के विशालतम जलाशयों में एक रिहंद डैम में वाटर क्रूज की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
विंध्य वन परिक्षेत्र के तहत आने वाले सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली का नौगढ़ परिक्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता के साथ ऐतिहासिक एवं पौराणिक धरोहरों के लिहाज से काफी समृद्ध है।
इसको देखते हुए पूरे परिक्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध बनाने की आवाज लंबे समय से उठती रही है। इस बार पूरे परिक्षेत्र को एक साथ इको टूरिज्म का हब बनाने का निर्णय लिया गया है।
इसके लिए कैमूर, चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार के महत्वपूर्ण स्थलों का चयन किया गया है। साथ ही सोनभद्र के विजयगढ़ दुर्ग, रेणुकूट स्थित रेणुकेश्वर महादेव मंदिर, मिर्जापुर के चुनार और विंढमफाल की तस्वीर संवारने की
योजना बनाई गई है। पर्यटन को लेकर होने वाली पहल से अछूता माने जाने वाले रेणुकूट परिक्षेत्र पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया है। इको टूरिज्म के नक्शे पर रेणुकूट, अनपरा और शक्तिनगर परिक्षेत्र को हाथीनाला के नाम से पहचान देने के साथ ही स्थलों को विकसित करने की कोशिश शुरू कर दी गई है।